कलियुग में ईश्वर पाने के इच्छुक साधकों से निर्मित है सहज योग परिवार
ईश्वर को पाने की तीव्र इच्छा (दाह) ही सच्ची भक्ति है, जो निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और निरंतर साधना से पूरी होती है। इसके लिए अहंकार त्यागकर, सांसारिक मोह कम करके, निष्काम कर्म और सेवा के माध्यम से स्वयं को शुद्ध करना आवश्यक है। यह प्रेम, ज्ञान और ध्यान का एक ऐसा मार्ग है जो अंततः ईश्वर से साक्षात्कार कराता है ईश्वर से आत्मा के इस मिलन को आत्मसाक्षात्कार कहते हैं।
सच्चा मंदिर हमारा अंतर्मन है, ईश्वर को पाना है तो अंतर्मन को शुद्ध कर आत्मा बनना होगा। आत्मा का निवास हममें है, ईश्वर की खोज बाहर नहीं, भीतर से शुरू होती है। यदि वास्तव में ईश्वर को पाना है, तो पहले अपने जीवन को इतना शुद्ध और निर्मल बनाना होगा कि उसमें ईश्वर की झलक स्पष्ट दिखाई दे। हम प्रायः ईश्वर को मंदिरों, मूर्तियों या तीर्थस्थलों तक सीमित कर देते हैं और मानते हैं कि वहीं से ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। यह एक आसान प्रयास है। हम ईश्वर को एक ही स्थान पर या एक ही प्रतिमा में देखना चाहते हैं और ईश्वरीय अनुभूति ना होने पर यह मान लेते हैं कि यही हमारा भाग्य है। परंतु सत्य यह है कि ईश्वर सर्वत्र हैं, हर स्थान हर जगह पर है उसे पाने के लिए यात्रा नहीं शुद्ध इच्छा करनी है, सही विधि ढूंढनी है और सही मार्गदर्शक गुरु तक पहुँचना है।
सहज योग परिवार के सदस्य इसी शुद्ध इच्छा के साथ सहज योग की सीढ़ी तक पहुँचे, जहाँ परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी की ध्यान विधि ने उन्हें आत्मिक उत्थान दिया उनके लिए आत्मसाक्षात्कार का द्वार खोला। सहज योग ध्यान धारणा बहुत सहज है, सरल है और सबसे आसानी से समझ में आ जाती है।
हमारे अंदर स्थित सर्पाकार कुंडलिनी शक्ति के जागृत होते ही प्रकृति के पांचों तत्वों से हमारे जुड़े रहने का ज्ञान हमें प्राप्त होता है और यही पंचतत्व हमारे सात चक्र और तीनों नाड़ियों की जागृति व संतुलन में हमारे सहायक बनते हैं। अब परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी हमारी मां बन जाती है और हम स्वयं के गुरु बन जाते हैं। आत्मज्ञान पाने की आकांक्षा हमें स्वयं के गुरु पद तक पहुँचा देती है और ईश्वर के साम्राज्य की अधिकारी भी बना देती है। नियमित ध्यान धारणा सहज योग के नियम हैं। ईश्वरीय चैतन्य के हाथों से, सिर के तालु भाग से प्रवाहित होते ही हम निर्विचार अवस्था को प्राप्त करते हैं। निर्विकल्प समाधि की अवस्था में हम ब्रम्हांडीय मौन में रहते हैं, ईश्वर के साम्राज्य के साक्षी होते हैं।
सहज योग परिवार से जुड़ने व ईश्वर के साम्राज्य के अधिकारी बनने हेतु सहज योग से जुड़ें। अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं। सहज योग सदैव नि:शुल्क है।

