पौराणिक ग्रंथों में वर्णित कुण्डलिनी जागरण का प्रमाण है सहजयोग
बदलाव उन्नति को दर्शाता है, जिस प्रकार समय के साथ- साथ मानव जीवन-शैली में बदलाव आया है उसी प्रकार समय के साथ- साथ प्रकृति को भी बदलाव करने पड़ते हैं। धरती पर अवतरित हुए सभी अवतरणों ने इस बदलाव की आवश्यकता को अपने-अपने तरीकों से एवं समय जिस प्रकार के तरीकों की मांग करता है उन तरीकों से मनुष्य को सही पथ पे चलने के लिए प्रेरित किया है।सभी के तरीके भले ही भिन्न थे परंतु संदेश एक ही था। इसी विषय पर पर प्रकाश डालते हुए सहजयोग की संस्थापिका श्री माता जी निर्मला देवी जी कहते हैं कि आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है सहजयोग।
श्री माता जी साधकों को संबोधित करते हुए समझाते हैं कि प्राचीन काल से चले आ रहे हठयोग, राजयोग आदि उस प्राचीन समय की आवश्यकता थे पर क्योंकि अब मानव विकसित होने की चरम सीमा पर है तो उसे इस बदलाव से मित्रता कर आधुनिक समय की मांग को समझ कर खुद पर कार्य करना होगा, स्वयं को समझना होगा। जो शुद्धता मानव प्राचीन काल में अपने घरों से एवं संबंधियों से दूर रह कर कड़ी तपस्या करने से प्राप्त करता था ताकि वह परमात्मा के प्रेम शक्ति की अनुभूति कर सके, आज के समय में वह शुद्धता, चैतन्य की सतर्कता एवं परमात्मा की प्रेम शक्ति को कुंडलिनी जागरण की सहायता से क्षण भर में अपने सूक्ष्म तंत्र पर महसूस कर सकता है। कुंडलिनी जागरण श्री माता जी के द्वारा दी गई मानवता को एक ऐसी भेंट है जिसने मानव की सत्य-खोज को एक सुंदर आयाम प्रदान किया है। आज के समय विश्व भर में फैला हुआ सहजयोग करोड़ों में सत्य के साधकों द्वारा अपनाया गया है एवं उन सभी ने इस सुंदर अनुभव को अपने अंदर एक सुंदर बदलाव के रूप में देखा है। सहजयोग का प्रथम चरण ही कुंडलिनी जागरण है, जिसकी सहायता से मनुष्य का संबंध परमात्मा की सर्वव्यापी प्रेम शक्ति से हो जाता है और वह सुंदर प्रेम से प्लावित हो जाता है। सभी पौराणिक ग्रंथों में कुंडलिनी जागरण एवं सहजयोग की परिभाषा का वर्णन किया गया है। यदि मनुष्य ही निर्वाज्य प्रेम से भर जाएगा तो विश्व में हो रही धन और सत्ता की अंधी लड़ाई को खत्म कर केवल आपसी प्रेम की भावना रखेगा और इसी प्रकार पूरा विश्व हर भेदभाव को भुलाकर एक हो जाएगा। यही सपना श्री माता जी ने अपनी आँखों में लिए विश्व भर में यात्राएं की और साधकों की कुंडलिनी जागृत की तथा उसी प्रेम के धागे से सभी सहजयोगियों को बांध एक सुंदर विश्व स्थापित करने का संदेश मनुष्य को दिया।
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