दिव्य भारतीय संस्कृति का प्रत्यक्ष स्वरूप है सहजयोग
सहजयोग परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा संस्थापित एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मानव, धर्म की सत्यता व वास्तविकता से परिचित होता है। सहजयोग कोई संस्था या संगठन नहीं वरन् एक संस्कृति का नाम है। श्री माताजी ने स्वयं इसका वर्णन अपनी पुस्तक 'सहजयोग' में किया है।
श्री माताजी के अनुसार, सहजयोग को समझने की एकमात्र विधि यह है कि, नम्र जिज्ञासु बनकर व्यक्ति आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करे। आत्म साक्षात्कार के पश्चात् यदि व्यक्ति सत्यता से सहज मार्ग को अपनाता है तो स्वयं हमारी कुंडलिनी शक्ति ही हमें सहज संस्कृति में प्रतिस्थापित करती जाती है। उसके लिए हमें अलग से कोई प्रयत्न नहीं करना होता जब मनुष्य आत्मा के ज्ञान को प्राप्त कर लेता है तब उसकी कुंडलिनी शक्ति की जागृति होती है तो वह स्वयं ही भौतिकता से परे हो जाता है। झूठ, बेईमानी, लोभ, मोह आदि अवगुण स्वयं ही उसका साथ छोड़ देते हैं। चरित्र में नैतिकता का गुण सहजयोगियों की पहचान बन जाता है। सहज व्यक्ति सदैव ही भयमुक्त, चिंतामुक्त, आनंद में मग्न रहता है क्योंकि आत्म साक्षात्कार प्राप्त करने के साथ ही वह परमात्मा के साम्राज्य में प्रवेश कर लेता है जहां प्रत्येक व्यक्ति तृप्त व संतुष्ट होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसमें आप सांसारिक जीवन में रहकर सन्यास भाव को प्राप्त कर लेते हैं तथा प्रत्येक उतार-चढ़ाव के प्रति साक्षी स्वरूप हो जाते हैं सहज संस्कृति में व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कमी अपने जीवन में महसूस नहीं होती। किसी से कुछ पाने की लालसा समाप्त हो जाती है तथा देने का भाव जागृत होता है। निश्चित ही संसार में रहते हुए हर कार्य में धन की आवश्यकता होती है इसके लिए स्वयं श्री माताजी ने कहा है, कृपया याद रखिए कि हम परमात्मा के साम्राज्य में हैं और यह नागरिकता आपकी हर आवश्यकता को पूर्ण करती है हर वक्त आप इसका अनुभव करेंगे सहज योग का कार्य करने के लिए जब भी आप प्रयत्नशील होंगे किसी भी प्रकार से आपको साधनों की उपलब्धता हो जाएगी। परंतु इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि आप कर्मठता को छोड़ दें श्री माताजी के अनुसार सहजयोगी आलसी, कंजूस अथवा वैभव का प्रदर्शन करने वाले नहीं होते। वह अत्यंत विनम्र, प्रेममय तथा सभी का मान करने वाले होते हैं श्री माताजी के शब्दों में सहज योगी का हृदय गुलाबी रंग के कमल सा होना चाहिए जिसमें अतिथि सत्कार, माधुर्य तथा आनंदमय स्वभाव छलक पड़े।
आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं। सहज योग पूर्णतया निशुल्क है।

