गृहस्थ जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का सहज मार्ग है सहजयोग
गृहस्थ धर्म का विवेकपूर्ण पालन ही सहजयोग का वास्तविक स्वरूप है। योग का वास्तविक अर्थ है जुड़ना, मिलना या एकत्व की अवस्था को प्राप्त करना। यद्यपि समय के साथ अनेक प्रकार की योग पद्धतियाँ प्रचलित हुईं, किन्तु प्रत्येक योग का मूल उद्देश्य मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराना तथा आत्मा का परमात्मा से मिलन कराना है। यदि वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो प्रकृति का प्रत्येक अणु और परमाणु स्थायित्व प्राप्त करने के लिए दूसरे तत्वों के साथ जुड़ने का प्रयास करता है। उसी प्रकार मनुष्य भी पंचमहाभूतों से निर्मित होने के कारण पूर्णता की खोज में रहता है। उसकी यह खोज तभी पूर्ण होती है जब वह अपने भीतर स्थित आत्मतत्त्व का अनुभव करता है और परम चेतना से उसका योग स्थापित होता है। आत्मज्ञान, आत्मविस्तार और आत्मसाक्षात्कार तक पहुँचने के अनेक मार्ग हो सकते हैं, किन्तु सभी का अंतिम लक्ष्य एक ही है—असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर तथा सीमित चेतना से असीम चेतना की ओर अग्रसर होना। अनेक आध्यात्मिक मार्ग सांसारिक जीवन से विरक्ति की प्रेरणा देते हैं, जबकि सहजयोग यह सिखाता है कि गृहस्थ जीवन का त्याग किए बिना भी आध्यात्मिक उन्नति संभव है। भारतीय संस्कृति में गृहस्थ आश्रम को जीवन का आधार माना गया है और गृहस्थ धर्म का विवेकपूर्ण, संतुलित तथा मर्यादित पालन ही सहजयोग का वास्तविक स्वरूप है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा प्रदत्त सहजयोग आत्मसाक्षात्कार की ऐसी सहज, सरल और सर्वसुलभ पद्धति है, जिसमें साधना का आरंभ वहीं से होता है जहाँ तक पहुँचने के लिए अन्य साधकों को वर्षों के कठिन तप या अनेक जन्मों की साधना करनी पड़ सकती है। श्री माताजी की कृपा से आत्मसाक्षात्कार के माध्यम से साधक क्षणभर में परम चैतन्य से जुड़ने का अनुभव कर सकता है। इस मार्ग में न तो गृहस्थ जीवन का त्याग आवश्यक है, न किसी संबंध या भौतिक वस्तु का परित्याग और न ही किसी प्रकार का आर्थिक शुल्क। आवश्यक है केवल निर्मल हृदय, पूर्ण समर्पण और नियमित साधना। आत्मसाक्षात्कार के बाद प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल कुछ मिनट निर्विचार ध्यान में स्थित रहकर अपनी आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ बनाए रखना सहजयोग का महत्वपूर्ण अंग है। सहजयोग हमें अहंकार, लोभ, मोह, क्रोध, ईर्ष्या तथा दुर्व्यसनों का त्याग करना सिखाता है, जबकि प्रेम, करुणा, संतोष, क्षमा और आनंद जैसे सद्गुणों को जीवन में स्थापित करता है। यही कारण है कि सहजयोगी वही बन सकता है जो अपने पारिवारिक दायित्वों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए प्रेमपूर्ण, संतुलित, आनंदमय और संतुष्ट जीवन व्यतीत करे। सहजयोग पूर्णतया नि:शुल्क है। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 पर संपर्क करें अथवा sahajayoga.org.in वेबसाइट पर अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी प्राप्त करें।

