सहजयोग : ब्रह्मांडीय स्पंदनों और सुप्त शक्तियों की जागृति का विज्ञान

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संपूर्ण ब्रह्मांड की संरचना में दो प्रकार के तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है — जैविक और अजैविक। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार ये दोनों तत्व आदिशक्ति के स्वरूपों, श्री लक्ष्मी और श्री सरस्वती, द्वारा संचालित होते हैं। श्री लक्ष्मी जहां श्री विष्णु की शक्ति के रूप में पदार्थ और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करती हैं, वहीं श्री सरस्वती ज्ञान, नाद और चेतना की अधिष्ठात्री हैं।
पदार्थ और शब्द, दोनों ही मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं, किंतु आदिशक्ति के तीसरे स्वरूप महाकाली की माया के कारण मनुष्य इनकी बाहरी परतों में उलझा रहता है। पदार्थों का आकर्षण उसे स्थूलता तक सीमित रखता है, जबकि शब्दों की माया व्यक्ति को प्रिय-अप्रिय, सफल-असफल तथा भ्रम और द्वंद्व में बांधे रखती है। शास्त्रों में शब्दों को तीन स्तरों पर वर्णित किया गया है —
वे शब्द जिन्हें हम बोलते और सुनते हैं,
वे जो केवल भीतर सुनाई देते हैं, जैसे विचार, स्मृतियां और कल्पनाएं,
तथा मानस स्तर के सूक्ष्म स्पंदन, जहां वर्ण और चेतना का अनुभव होता है।
मनुष्य प्रायः दूसरे प्रकार के शब्दों — विचारों और मानसिक प्रतिक्रियाओं — से प्रभावित और भ्रमित होता रहता है। वस्तुओं को देखकर उत्पन्न इच्छाएं ही विचार और शब्दों का रूप लेती हैं।
भारतीय दर्शन के अनुसार वास्तविक ज्ञान न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट। वह जन्म से ही मनुष्य के भीतर विद्यमान रहता है। जैसे-जैसे आत्मा और चेतना के बीच की दूरी कम होती है, वैसे-वैसे यह ज्ञान प्रकट होने लगता है। तब साधक सूक्ष्म शरीर के चक्रों पर वर्णों और स्पंदनों का अनुभव करता है, जो ब्रह्मांडीय नाद से जुड़कर गहन आत्मबोध का मार्ग खोलते हैं।
जिसे स्वयं का ज्ञान नहीं होता, उसका बाहरी ज्ञान भी अधूरा और भ्रमपूर्ण रह सकता है। हम अक्सर दूसरों के अनुभवों को ही ज्ञान मान लेते हैं, जबकि वास्तविक खोजकर्ता वही है जो स्वयं अनुभव और आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करे। 
श्री माताजी निर्मला देवी जी द्वारा स्थापित सहजयोग आत्मसाक्षात्कार और ब्रह्मानुभूति का एक सहज एवं वैज्ञानिक मार्ग है। यह अंधविश्वास, कर्मकांड और बाहरी आडंबरों से परे जाकर विवेक, ध्यान और आंतरिक जागृति पर आधारित है। सहजयोग व्यक्ति को विचारों की निरंतरता से बाहर निकालकर ध्यान की अवस्था में ले जाता है, जहां वह अपने भीतर विद्यमान उस सहज ज्ञान और शक्ति का अनुभव कर सकता है जो जन्म से उसके साथ होती है।
सहजयोग के अभ्यास से साधक स्पंदनों की सूक्ष्म भाषा को समझने लगता है, जिसे अधिक वास्तविक, तीव्र और प्रभावशाली माना गया है। इसी माध्यम से व्यक्ति स्वयं तथा दूसरों की मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति का अनुभव कर सकता है।
सहजयोग पूर्णतः निःशुल्क है। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-270-0800 पर संपर्क कर सकते हैं।

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