PMLA की वैधता पर सुनवाई से SC का इनकार, कहा- 'कानून से बचने के लिए कोर्ट न आएं अमीर'
नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अमीर कानून को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत लोग केस दर्ज होने के बाद उस कानून को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख करते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने इस बढ़ते 'ट्रेंड' पर चिंता भी जाहिर की है।
शीर्ष न्यायालय में सीजेआई कांत और जस्टिस जॉयमाला की बेंच सुनवाई कर रही थी। दिल्ली के वकील गौतम खैतान की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी, जिनके खिलाफ अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील मामले में केस दर्ज हुआ है। उनकी तरफ से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा कोर्ट पहुंचे थे।
खैतान ने PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी है। इसपर सीजेआई ने कहा, 'यह बहुत ही दुर्लभ ट्रेंड चल रहा है कि जब ट्रायल चल रहा हो तब... अमीर और प्रभावशाली कानून को चुनौती देने के लिए कोर्ट आते हैं। किसी भी अन्य नागरिक की तरह ट्रायल का सामना कीजिए।'
कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि कानूनी प्रावधानों को पहले दी गई चुनौतियां अभी लंबित हैं।
खास बात है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी अगस्त 2025 में इसी तरह की याचिका दी थी। उन्होंने PMLA की धारा 44 के तहत ED यानी प्रवर्तन निदेशालय के प्रावधानों को चुनौती दी थी।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

