कर्म को साधना बनाता है निष्काम भाव : सहज योग
मानव जीवन कर्मप्रधान है। कर्म के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं, लेकिन कर्म की वास्तविक सार्थकता इस बात में है कि उसे किस भाव से किया जा रहा है। जब कर्म के साथ ‘मैंने किया’ का भाव जुड़ जाता है, तो सहज रूप से किया गया कार्य भी अहंकार का कारण बन सकता है। इसके विपरीत जब कर्म निःस्वार्थ भाव और ईश्वर के प्रति समर्पण के साथ किया जाता है, तो वही कर्म सच्ची साधना का रूप ले लेता है।
सहज योग की संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवी ने आत्म-साक्षात्कार और ध्यान के माध्यम से मनुष्य को अपने भीतर की दिव्य शक्ति को पहचानने का मार्ग बताया। सहज योग में साधक को यह अनुभव करने की प्रेरणा दी जाती है कि जीवन में किए जाने वाले शुभ कर्मों के पीछे ईश्वर की शक्ति कार्य करती है और मनुष्य उस शक्ति का केवल माध्यम है।
सामान्य जीवन में अपने अच्छे कार्यों पर गर्व करना स्वाभाविक है, लेकिन जब गर्व ‘मैंने यह किया’, ‘मेरे कारण यह संभव हुआ’ जैसी भावना में बदल जाता है, तब कर्ता भाव उत्पन्न होता है। यही कर्ता भाव आध्यात्मिक उन्नति में बाधा बन सकता है। सहज योग साधना व्यक्ति को इस ‘मैं’ के भाव से ऊपर उठकर अपने कर्मों को परमात्मा को समर्पित करने की प्रेरणा देती है।
सहज योग ध्यान में इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का विशेष महत्व बताया गया है। इड़ा और पिंगला के संतुलन से साधक के भीतर संतुलन और जागरूकता विकसित होती है तथा वह सुषुम्ना मार्ग के माध्यम से आध्यात्मिक उत्थान की दिशा में आगे बढ़ता है। ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को अधिक सजगता से देखता है तथा आंतरिक शांति का अनुभव करता है।
सेवा भी साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेवा करते समय यदि प्रशंसा, सम्मान या व्यक्तिगत श्रेय की अपेक्षा न हो, तो सेवा वास्तव में निष्काम कर्म बन जाती है।* ‘कर्ता और करविता ईश्वर है, मैं केवल उसका माध्यम हूं’* यह भाव मनुष्य को अहंकार से दूर कर भीतर से अधिक शांत और संतुष्ट बनाने में सहायक हो सकता है। आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक जीवन में सहज योग ध्यान व्यक्ति को अपने भीतर लौटने, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में बढ़ने और जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है।
आइए, सहज योग से जुड़ें, ध्यान की सरल तकनीक सीखें और अपने कर्मों को निःस्वार्थ भाव से ईश्वर को समर्पित करने का प्रयास करें। सहज योग ध्यान केंद्र सभी नए साधकों का स्वागत करता है।
सहज योग के बारे में अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 270 0800 अथवा www.sahajayoga.org.in पर संपर्क करें। सहज योग पूर्णतया निःशुल्क है।

