श्री महाकाली भूतकाल के बंधनों से मुक्त कर आनंद प्रदान करती हैं
सहजयोग संस्थापिका परम पूज्य आदिशक्ति श्री माताजी निर्मला देवी जी द्वारा वर्णित है कि, "हमारे अंदर तीन तरह की शक्तियां विराजती हैं। पहली जो शक्ति है मुख्यतः वह है इच्छा शक्ति। अगर परमात्मा की इच्छा ही नहीं होती तो वे संसार क्यों बनाते ? उनकी इच्छाशक्ति के अंदर से ही बाकी की शक्तियां निकली हैं। इसी इच्छाशक्ति को सहज योग की भाषा में महाकाली की शक्ति कहते हैं।” (नई दिल्ली 17 / 2/ 1989)
महाकाली की शक्ति हमारे बायीं ओर ईड़ा नाड़ी से प्रवाहित होती है।परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी ने महाकाली का वर्णन करते हुए कहा है, "वे आनंद प्रदायिनी हैं और अपने भक्तों को आनंदित देखकर प्रसन्न होती हैं। आनंद ही उनका गुण और शक्ति है। विभिन्न चक्रों पर आप विभिन्न प्रकार के आनंद अनुभव करते हैं वह सब महाकाली की देन होती है।( फ्रांस 12/ 9 /1990)
श्री महाकाली दो तरह से कार्य करती हैं। जहां एक ओर हमें उनके प्रेममयी, आनंद एवं खुशी से परिपूर्ण स्वरूप के दर्शन होते हैं, तो वहीं दूसरी ओर अति क्रूर क्रुद्ध और असुरों का वध करने वाले रौद्र रूप के। वे अपने दोनों ही स्वरुपों द्वारा अपनी पवित्र, सरल, विवेकी आत्मसाक्षात्कारी संतानों के हित के लिए कार्य करती हैं।
श्री माताजी ने अपनी अमृतवाणी में उपदेशित किया है कि," जब हम अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करते हैं तो श्री महाकाली का प्रकटीकरण आरंभ हो जाता है। महाकाली में शुद्धिकरण की शक्ति है और वे स्वयं आप में पवित्र सती के रूप में रहती हैं। वही कुंडलिनी हैं, वही श्री महाकाली शक्ति हैं।" (फ्रांस 12/ 9/ 1990)
स्त्रियों में श्री महाकाली शक्ति अपने शांत स्वरूप में शालीनता का गुण प्रकट करती हैं। श्री माताजी के अनुसार, "जब तक शालीनता स्त्री में कार्यान्वित नहीं होती तब तक गृहलक्ष्मी की शक्ति उसके अंदर प्रकटित नहीं होती।" (जयपुर 11/ 12 /1994 )
आत्म साक्षात्कार की प्राप्ति के पश्चात ध्यान धारणा द्वारा महाकाली की शक्ति जागृत की जा सकती है। जिससे हम बायीं ओर की समस्याओं, भूतकाल के बंधनों तथा अनेक प्रकार की मानसिक व शारीरिक बाधाओं से सहज में मुक्ति पा सकते हैं।
सहज योग निशुल्क भी है और आसान भी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी हेतु टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं।

