बामौरकलां के सीताराम यादव बने मध्यप्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर, पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता
ग्रामीण विद्यालयों से पढ़ाई कर रचा इतिहास, परिवार में अब दो-दो सब-इंस्पेक्टर; युवाओं के लिए बने प्रेरणा
अतुल जैन
खनियांधाना। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है। इस बात को बामौरकलां क्षेत्र के होनहार युवा सीताराम यादव ने सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एमपी पुलिस एसआई) भर्ती परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बामौरकलां क्षेत्र का नाम प्रदेशभर में गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष का माहौल है और लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं।
सीताराम यादव की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कक्षा 12वीं तक की पूरी स्कूली पढ़ाई बामौरकलां के विद्यालयों में हुई। इसके बाद उन्होंने इंदौर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। ग्रामीण क्षेत्र में रहकर कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन करते हुए उन्होंने नए परीक्षा पैटर्न, संशोधित पाठ्यक्रम और बदले हुए शारीरिक मापदंडों के अनुरूप तैयारी की तथा पहले ही प्रयास में सब-इंस्पेक्टर परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा और लगन का परिचय दिया।
सीताराम यादव की यह सफलता उनकी पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वे कई प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हो चुके हैं। उनका चयन दो बार मध्यप्रदेश पुलिस, पटवारी, जेल विभाग, सीआईएसएफ, रेलवे तथा मध्यप्रदेश वन विभाग जैसी विभिन्न सेवाओं में हो चुका है। अब मध्यप्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद पर चयन ने उनकी उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। उनकी लगातार मिल रही सफलताएं अनुशासित तैयारी, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का परिणाम मानी जा रही हैं।
इस उपलब्धि ने परिवार को भी विशेष पहचान दिलाई है। सीताराम यादव के बड़े भाई नीलम सिंह यादव, बहादुरपुर (जिला अशोकनगर), पहले से ही मध्यप्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। अब सीताराम के चयन के बाद परिवार में दो-दो सब-इंस्पेक्टर हो गए हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। सीताराम यादव की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती, यदि व्यक्ति का संकल्प मजबूत हो और तैयारी ईमानदारी से की जाए।
बामौरकलां के लोगों का मानना है कि सीताराम यादव की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मजबूत संदेश है। गांव की पाठशाला से निकलकर प्रदेश की प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। उनकी सफलता ने पूरे क्षेत्र के युवाओं में नई ऊर्जा और बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास जगाया है।

