वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात जवानों को मिला घटिया खाना
ब्यूरो चीफ दिव्यानंद अर्गल
ग्वालियर। यह कोई रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाला जनता खाना नहीं है, बल्कि यह वह भोजन है जो शहर भर के नाके-चौराहों पर तैनात उन पुलिस जवानों के लिए भेजा गया है, जो सुबह करीब 7 बजे से लेकर देर रात तक देश के गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा में डटे हुए हैं।
मौके पर जब इस भोजन को देखा गया, तो यह रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले सस्ते खाने के डिब्बे जैसा नजर आया। खाने में छह सूखी कच्ची पूड़ियाँ, दो सब्जियाँ और मीठे में पैठे का एक छोटा सा टुकड़ा शामिल था।
जब इस भोजन को लेकर पुलिस कर्मियों से बात करने की कोशिश की गई, तो जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि कोई इस तरह का खाना दो दिन लगातार खा ले, तो बीमार पड़ना तय है। जवानों का कहना है कि वे खाना तो लेते हैं, लेकिन कई बार मजबूरी में उसे खा भी नहीं पाते।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शहर में होने वाली छोटी-सी बैठक तक में अधिकारियों के लिए होटल तानसेन से विशेष भोजन और नाश्ता मंगवाया जाता है, लेकिन वही पुलिस जवान, जो कड़ाके की ठंड में आम जनता की सुरक्षा के साथ-साथ वीवीआईपी सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें इस स्तर का खाना दिया जा रहा है।
यह सवाल व्यवस्था पर जरूर खड़ा करता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि ग्वालियर पुलिस के जवान पूरे अनुशासन, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। जवानों ने कभी भोजन को लेकर प्रदर्शन या विरोध नहीं किया, बल्कि चुपचाप अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और यह सुनिश्चित करें कि जो जवान दिन-रात जनता और देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा में तैनात हैं, उन्हें सम्मानजनक, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिले।
क्योंकि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की नींव मजबूत और संतुष्ट जवानों से ही होती है।

