देवी के अष्टम स्वरूप मां महागौरी ( कुंडलिनी शक्ति) के प्राकट्य से  अज्ञान रूपी अंधकार का नाश होता है

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अपना भारत देश शक्ति का पुजारी है । नवरात्रि में शक्ति के विविध रूपों का पूजन-अर्चन एवं ध्यान किया जाता है। भगवती दुर्गा माँ के आठवें स्वरूप का नाम महागौरी है।  देवी की  यह शक्ति अमोघ है व इनकी आराधना  उत्तम फल प्रदान करती है। इनकी उपासना से साधक के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं।
सहजयोग संस्थापिका प. पू श्री माताजी निर्मला देवी जी ने व्याख्या की है कि, नवरात्रि के आठवें दिन हम महागौरी का ध्यान करते हैं जिन्हें आदिकुंडलिनी भी कहा गया है। श्री महागौरी स्वरुपिणी देवी ने आपको आत्मसाक्षात्कार दिया है क्योंकि वे आपमें अपना प्रतिबिंब देखना चाहती हैं। कुंडलिनी शक्ति देवी भगवती की इच्छाशक्ति है।  कुंडलिनी मात्र कल्पना न होकर मानव के अन्तःस्थित जीवंत शक्ति है। यह शक्ति सभी मनुष्यों में है और सहजयोग द्वारा सामान्य मनुष्य में स्वतः ही इसकी जागृति घटित हो जाती है। कुंडलिनी धर्म परायण है और यह माँ साक्षी भाव में हैं। फिर भी यह जानती हैं कि व्यक्ति के अंदर क्या अच्छाई है और क्या बुराई। कुंडलिनी की कृपा से शरीर व मन के रोग दूर हो जाते हैं। आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति के शरीर से प्रसारित होने वाली चैतन्य लहरियां, उसके शरीर, मन एवं अहंकार रूपी आवरणों को स्वच्छ कर देती हैं।  मानव में स्थित महागौरी स्वरुपिणी कुंडलिनी शक्ति विशुद्ध प्रकाश पुंज के रूप में सहस्त्रार को प्रकाशित करती है। मां महागौरी को बल मेधा शक्ति से प्राप्त होता है, जिसकी वृद्धि व संतुलन ध्यान द्वारा संभव है। नियमित ध्यान के अभ्यास से मेधा शक्ति बलवती होकर ज्ञान, ज्ञाता व ज्ञेय को समग्र कर देती है और साधक को पूर्ण व शाश्वत सत्य का साक्षात् प्राप्त होता है। जिस प्रकार सूर्योदय के साथ ही अंधकार का नाश हो जाता है, उसी प्रकार मानव में महागौरी के प्राकट्य से समस्त अज्ञान, विकार और अंधकार ओझल हो जाता है और समस्त चक्रों व नाड़ियों की शक्ति का प्रवाह सहस्रार केंद्र में होने लगता है। इसके साथ ही मानव का महामानव और परमहंस के रूप में पुनर्जन्म हो जाता है।  इस नवरात्रि आप अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नजदीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं।

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