राष्ट्रीय स्मारक भीम जन्मभूमि महू का मामला - मेमोरियल सोसायटी जांच प्रकरण में पंजीयक भोपाल में पेशी, सुनवाई आज

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रिपोर्टर.... जितेन्द्र वर्मा ब्यूरो रिपोर्ट 
महू। संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जन्मभूमि महू स्थित राष्ट्रीय स्मारक की संचालक संस्था 'डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी' के प्रबंधकीय विवाद में धारा 32 के तहत समिति की जांच, रिकॉर्ड जब्ती और प्रशासक नियुक्ति के मामले ने अब गति पकड़ ली है। 
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्मारक महू के अतिसंवेदशील विवाद में संस्था के 23 में से 19 अर्थात दो तिहाई बहुमत वाले सदस्यों द्वारा समिति की जांच की मांग पर कार्यवाही नहीं होने के चलते माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर जारी निर्देशों के बाद पंजीयक फर्म्स एवं सोसायटी भोपाल ने मामले में आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही शुरू कर दी है। ​पहली सुनवाई का विवरण में सदस्यों द्वारा 17 नवंबर को अभ्यावेदन जमा करने के बाद 12 दिसंबर को आयोजित पहली आधिकारिक सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने विद्वान् अधिवक्ताओं के साथ उपस्थित होकर दावे और प्रमाण संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए। जिसमें पंजीयक महोदय ने समिति संचालन के विवादित बिंदुओं के दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेकर प्रारंभिक कार्यवाही को पूरा किया था। ​विवाद का मुख्य संदर्भ में ​विदित हो कि मेमोरियल सोसायटी के प्रबंधकीय ढांचे के कुल 23 सदस्यों में से दो तिहाई बहुमत वाले 19 सदस्यों ने अनियमित कार्यप्रणाली, गंभीर वित्तीय अनियमितता, कुप्रबंधन और नियम प्रावधानों के विपरीत गतिविधियों में लिप्त आरोपी निष्कासित सचिव राजेश वानखेड़े और आंबेडकर संस्थान ब्राउस में तृतीय श्रेणी कर्मचारी इसके सगे मामा कोषाध्यक्ष अरुण कुमार इंगले ने अपनी कारस्तानियों पर पर्दा डालने हेतु नकली बहुमत बनाने का षडयंत्र किया और इसे अंजाम देने रात के अंधेरे में राष्ट्रीय स्मारक के ताले तोड़ अलमारी से दस्तावेजों को गायब कर गंभीर जालसाजी की अपने भाईयो, भतीजों, करीबी रिश्तेदारों और साथियों को फर्जी सदस्यता देकर फर्जी अध्यक्ष और फर्जी निर्वाचन कराकर राष्ट्रीय स्मारक पर अवैध कब्जा कर लिया। इसी संगीन मामले में माननीय न्यायालय ने निष्पक्ष जांच और कार्यवाही के आदेश पारित किए थे।
सुनवाई पर टिकी निगाहें..
पहली सुनवाई में दस्तावेजों के अवलोकन के बाद पंजीयक भोपाल ने अगली पेशी के लिए 26 दिसंबर 2025, शुक्रवार का दिन तय किया है। जहां इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय या निर्देश आने की संभावना है। प्रशासनिक गलियारों सहित ​देशभर के आंबेडकर अनुयायियों में इस प्रकरण को लेकर भारी गहमागहमी का माहौल व्याप्त है।

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