माया के प्रभाव से मुक्ति का सहज मार्ग — सहजयोग
मनुष्य का जीवन आज माया के प्रभाव से गहराई से प्रभावित है। भौतिक सुख-सुविधाएँ, पद, प्रतिष्ठा, धन और बाहरी आकर्षण मनुष्य को क्षणिक आनंद तो देते हैं, परंतु भीतर से उसे अशांत, असंतुष्ट और भ्रमित बना देते हैं। यही भ्रम माया कहलाता है जो सत्य से दूर और अस्थायी को स्थायी मानने की अवस्था है।
माया के प्रभाव में आकर मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप, यानी आत्मा को भूल जाता है। परिणामस्वरूप तनाव, भय, अहंकार, ईर्ष्या और मोह जैसे विकार जीवन में बढ़ते चले जाते हैं। आधुनिक समाज की अधिकांश समस्याओं की जड़ यही आंतरिक असंतुलन है।
ऐसे समय में सहजयोग एक सरल, स्वाभाविक और प्रभावी आध्यात्मिक मार्ग प्रदान करता है। परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी द्वारा स्थापित सहजयोग में कुंडलिनी शक्ति के जागरण द्वारा आत्म-साक्षात्कार कराया जाता है। यह आत्म-साक्षात्कार ही माया के प्रभाव से बाहर निकलने की वास्तविक कुंजी है।
जब कुंडलिनी जागृत होकर सहस्रार चक्र को भेदती है, तब साधक को विचार-रहित जागरूकता की अवस्था प्राप्त होती है। इस अवस्था में मनुष्य माया को पहचानने लगता है और उसके प्रभाव में बहने के बजाय साक्षी भाव में जीवन जीता है।
सहजयोग के नियमित ध्यान से:
• मन शांत और संतुलित होता है
• अहंकार और अति-भावुकता में संतुलन आता है
• सही और गलत का विवेक जागृत होता है
• आंतरिक आनंद और सुरक्षा की अनुभूति होती है
जब भीतर का आनंद जागृत होता है, तब बाहरी आकर्षण स्वतः ही महत्व खो देते हैं। यही माया से मुक्ति का सहज और स्थायी मार्ग है।
आज आवश्यकता है कि हम बाहरी समाधान खोजने के बजाय भीतर की ओर देखें। सहजयोग न तो त्याग सिखाता है और न ही पलायन, बल्कि चेतना के उत्थान द्वारा जीवन को सार्थक, संतुलित और सत्य से जुड़ा हुआ बनाता है।
सहजयोग से निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं।

