गंभीर नदी के अस्तित्व पर संकट, महूगाँव और इंदौर के नालों से ज़हरीली हो रही मालवा की जीवनदायिनी

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जितेन्द्र वर्मा ब्यूरो रिपोर्ट 
महू  मालवा क्षेत्र की जीवन रेखा कही जाने वाली और ऐतिहासिक 'जानापाव' से निकलने वाली गंभीर नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है स्थानीय नगर निकायों की लापरवाही के चलते नदी में बिना उपचार (Untreated) के गंदा पानी, सीवेज और ठोस कचरा सीधे बहाया जा रहा है, जिससे न केवल जल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि जलीय जीव भी दम तोड़ रहे हैं।
 पूर्व मंडल अध्यक्ष, जयेश यादव ने इस गंभीर स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) सहित उच्चाधिकारियों को एक सामूहिक शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत में विशेष रूप से गौशाला घाट, तेलिखेड़ा और महुगाँव क्षेत्र का उल्लेख किया गया है, जहाँ नगर परिषद महुगाँव और इंदौर नगर निगम के नालों का ज़हरीला पानी सीधे नदी में मिल रहा है कानूनी प्रावधानों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है शिकायतकर्ता ने बताया कि यह कृत्य 'जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974' और 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986' का खुला उल्लंघन है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट आदेश हैं कि नदियों में बिना ट्रीटमेंट के सीवेज नहीं डाला जा सकता, फिर भी स्थानीय प्रशासन 'पोल्यूटर पेज' (Polluter Pays) सिद्धांत की अनदेखी कर रहा है।
वर्तमान में है डरावनी स्थिति..
काला पानी और दुर्गंध नदी का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका है और आसपास के क्षेत्रों में भारी दुर्गंध फ़ैल रही है बीमारियों का खतरा दषित पानी के कारण डेंगू, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। जैव विविधता का विनाश मछलियों और अन्य जलचरों की मृत्यु के संकेत मिल रहे हैं। धार्मिक आस्था को ठेस शिप्रा और चंबल में मिलने वाली इस पवित्र नदी की शुद्धता खत्म होने से स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं। जिसमें प्रमुख मांगें में शिकायत पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि नदी में गिर रहे नालों का तत्काल संयुक्त सर्वे किया जाए।  सीवेज का बहाव तुरंत रोककर STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की उचित व्यवस्था की जाए। लापरवाह अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो प्रदूषण बोर्ड द्वारा जल गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। नदी केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवन का आधार है यदि समय रहते प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो मालवा की यह धरोहर हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएगी।

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