जेन्युइन नशा मुक्ति केंद्र ने आरोपों को बताया निराधार, पीड़ित खुद आया मीडिया के सामने
ठीक होने के बाद भी परिजन नहीं लेने आ रहे, फीस से बचने का आरोप
राजेश धाकड़
इंदौर। सिद्धार्थ नगर, भंवरकुआ में संचालित जेन्युइन नशा मुक्ति केंद्र पर लगाए गए बंधक बनाने के आरोपों को केंद्र प्रबंधन ने सिरे से खारिज किया है। केंद्र के संचालक व समाजसेवी तथा शिवसेना पदाधिकारी परमजीत सिंह मैकेन ने बुधवार को मीडिया को आमंत्रित कर केंद्र की गतिविधियों की जानकारी दी और आरोप लगाने वाले परिवार के पीड़ित सदस्य से भी सीधी बातचीत करवाई।
मैकेन ने बताया कि वे पिछले करीब तीन वर्षों से सिद्धार्थ नगर क्षेत्र में जेन्युइन नशा मुक्ति केंद्र का संचालन कर रहे हैं। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों व काउंसलरों की टीम के सहयोग से सैकड़ों लोगों को नशे की लत से मुक्त कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी कई परिजन उसे घर ले जाने में रुचि नहीं दिखाते।
आठ माह से नहीं आए परिजन
केंद्र प्रबंधन के अनुसार हाल ही में नशे से मुक्त हो चुका एक युवक पिछले आठ माह से स्वास्थ्य लाभ की स्थिति में है, लेकिन उसके परिजन उसे लेने नहीं आए। उल्टा, परिजनों ने केंद्र पर युवक को बंधक बनाए रखने जैसे गंभीर और झूठे आरोप लगाए। मैकेन का कहना है कि वास्तविकता यह है कि मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और स्वयं घर लौटना चाहता है।
मीडिया के सामने आया पीड़ित
बुधवार को पीड़ित युवक ने मीडिया के समक्ष स्पष्ट कहा कि वह अपनी मर्जी से केंद्र में उपचाररत रहा, उसे किसी प्रकार से बंधक नहीं बनाया गया और अब वह स्वस्थ महसूस कर रहा है। उसने यह भी बताया कि वह घर जाना चाहता है, लेकिन उसके परिजन उसे लेने नहीं आ रहे हैं।
फीस से बचने की मंशा का आरोप
केंद्र संचालक ने आरोप लगाया कि संबंधित परिवार अब केंद्र की निर्धारित फीस का भुगतान नहीं करना चाहता, इसलिए निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। मैकेन ने कहा कि केंद्र पूरी तरह नियमों के अनुसार संचालित है और किसी भी तरह की जांच या सत्यापन के लिए वे प्रशासन व मीडिया के समक्ष पूर्ण रूप से सहयोग को तैयार हैं।
केंद्र प्रबंधन ने अपील की कि नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील विषय पर बिना तथ्यों की जांच के आरोप न लगाए जाएं, ताकि समाज में सकारात्मक कार्य कर रहे संस्थानों की छवि धूमिल न हो।

