नाग पंचमी का पावन पर्व : प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम

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नाग पंचमी, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व है। इस दिन नाग देवता की पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर भगवान शिव के गले में विराजमान नागों की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार नाग पंचमी का सीधा संबंध भगवान शिव, विष्णु और शेषनाग से है। इस दिन घरों के द्वार पर नाग देवता की मूर्ति या चित्र बनाकर दूध चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि यह पूजा व्रत संतान की रक्षा, परिवार की उन्नति और जीवन में बाधाओं को दूर करता है।

 प्रकृति से जुड़ा संदेश

नाग पंचमी का पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। नाग और सर्प पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सभी जीव-जंतु हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं, उनका संरक्षण और सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

 पूजा विधि

पंचमी के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

नाग देवता की मूर्ति, चित्र या मिट्टी से बनाए गए नाग की पूजा करें।

दूध, अक्षत, हल्दी-कुमकुम और पुष्प अर्पित करें।

इस दिन भूमि की खुदाई न करने की परंपरा है।

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 रणजीत टाइम्स की ओर से आप सभी को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! 

"भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाए।"

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