सहजयोग ध्यान से हृदयचक्र पर श्रीराम की उपस्थिति का साक्षात् अनुभव संभव

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श्री राम एक आदर्श पुरुष का प्रतिनिधित्व करते हैं। बचपन से ही हमें श्री राम जी के जीवन की कहानियां सुनाई जाती हैं, रामायण दिखाई जाती है। श्री राम जी ने अपने जीवन में उन सभी गुणों का महत्व समझाया है जो एक मनुष्य को आदर्श जीवन जीने के लिए आवश्यक है।
       वह एक आदर्श राजा हैं जिन्होंने हम व्यक्तियों में केवल प्रेम की धारा बहाई है। उन्होंने जाति - पांति के भेदभाव को फटकारा  है और प्रेम को सबसे ऊपर रखा है। एक भीलनी के जूठे बेर खाए, एक निषाद को मित्र बनाया और केवट को पार कर दिया क्योंकि इन सभी के अंदर केवल अनन्य भक्ति थी।परमपिता परमात्मा कभी किसी में भेदभाव नहीं करते। आप ही सोचिए कि क्या एक पिता अपने बच्चों को लड़ते देख खुश हो सकता है।
 श्री राम जी सभी के अंदर हैं और उनके गुणों पर चलने से ही विश्व का कल्याण हो सकता है। श्रीराम जी का हृदय में स्थापित होना बहुत आवश्यक है, और यह सहजयोग के माध्यम से सहज ही संभव है।
     श्री राम जी का स्थान हमारे हृदय चक्र के दाएं भाग में होता है, उनके गुण जागृत होने के बाद मनुष्य करुणा,संकोच,सकारात्मकता, व प्रेम से भर जाता है, वह अपने आप दिव्य गुणों से आशीर्वादित हो जाता है। वह सभी में परमात्मा के प्रतिबिंब को देखता है और उसके अंदर स्थित आत्मा का आदर करता है।
     सदियों से लोग बाह्य का पूजा-पाठ करते आए हैं, पर उससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ, क्योंकि संतुष्टि तो हृदय में विराजित श्रीराम ही देंगे। यदि मनुष्य ही प्रेम की सुंदर मूरत हो  जाएगा तो यह धर्म के झगड़े, भेद-भाव, एक दूसरे को नीचा दिखाना, अपना प्रभुत्व जमाना यह सब बीमारी नष्ट हो जाएगी। श्रीराम जी के सपनों का राज्य हम तभी स्थापित कर पाएंगे जब हमारे हृदय में श्रीराम आएंगे।
श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा, संस्थापित सहजयोग, द्वारा श्रीराम जी के गुणों को जागृत करना सहज है, क्योंकि परमात्मा के कार्य सहज में ही होते हैं।
यदि आप सहजयोग के बारे में और जानना चाहते हैं तो जानकारी टॉल फ्री नं 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं। सहजयोग पूर्णतः निःशुल्क है।

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