मामाजी की 27 वीं पुण्यतिथि आज- मामाजी की याद में घोषणाए हुई पर अमल नहीं

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उपेक्षा का शिकार है मामाजी का भील आश्रम
झाबुआ : राजेश सोनी
/26 दिसम्बर को ख्यातनाम समाजसेवी एवं स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्व. मामा बालेश्वर दयाल दीक्षित की 27 वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर बामनिया स्थित उनके भील आश्रम व समाधि स्थल पर अंचल सहित समीपवर्ती राजस्थान एवं गुजरात राज्यों से मामाजी के हजारों अनुयायी पहुंचेगें और मामाजी को श्रद्वाजंलि अर्पित करेंगे। मामाजी की इस 27 वीं बरसी पर उनके अनन्य भक्तगण कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए एवं निजी वाहनों के जरिए यहां पहुंचेगें। वैसे तो मामाजी के देहावसान के बाद पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष राजनेताओं का जमावडा रहा है किन्तु इन राजनेताओं की गई घोषणाऐं अभी तक मूर्त रूप नहीं ले पाई जिससे मामाजी के अनुयायियों का इन राजनेताओं से मोहभंग हो चुका है। किन्तु मामाजी के अनुयायियों को तो अपने आराध्य के धाम पर आने के लिए किसी बुलावे का इंतजार नहीं रहता है वे तो अपने इस देवता के धाम पर शीश नवाने के लिए पैदल ही चले आते है फिर चाहे सर्द मौसम की मार हो या राह की तकलीफें हो ,मामाजी के भक्त तो सारी तकलीफें मामाजी की जय जयकार करते हुए सह जाते है। मामाजी की पुण्यतिथि के 27 बरस बीतने के बाद भी हजारों की संख्या में उनके वनवासी अनुयायियों का हजारों की संख्या में यहां जुटना इस बात का प्रमाण है कि मामाजी के प्रति उनके अनुयायियों में अगाध श्रद्वा है।  
 घोषणाएं तो हुई पर अमल नहीं -
मामा बालेश्वर दयाल के अनुयायियों में कांग्रेस , भाजपा, जनतादल और समाजवादी बडी संख्या में रहे है। समय -समय पर मामाजी के जीते जी और उनके निधन के बाद पुण्यतिथि पर भी मामाजी के राजनेता अनुयायी यहां आते रहे है।

जिन्होंने मामाजी की स्मृति में कई घोपणाऐं यहां की थी , जिनमें
1-तत्कालीन केन्द्रीय रक्षामंत्री रहे श्री जार्ज फर्नाडीस द्वारा सैनिक स्कूल खोले जाने का प्रस्ताव
2-मामाजी की सुशिष्या रही प्रदेश की तत्कालीन उपमुख्यमंत्री श्रीमती जमुनादेवी ने अंग्रेजी, हौम्यापैथिक, आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक इन चारों प्रकार की चिकित्सा वाले सर्वसुविधायुक्त अस्पताल खोले जाने की घोपणा
3-तत्कालीन रेलमंत्री श्री नीतिश कुमार द्वारा बामनिया रेल स्टेशन को मामाबालेश्वर दयाल रेल्वे स्टेशन के नाम से मॉडल रेल स्टेशन बनाए जाने की घोषणा
4-तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजयसिंह की विशाल सभागृह बनाए जाने की घोषणा
प्रमुख रही थी। इसके अलावा मामाजी के अनुयायियों कई राजनेताओं ने कई घोपणाऐं की थी ,जो आज 27 वर्पो बाद भी ये सभी घोपणाऐं थोथी साबित हुई है।  इतने वर्षो में प्रदेश में रही सरकारे भी अपनें कार्यकाल में मामाजी के भील आश्रम के उत्थान और यहां आने वाले मामाजी के भक्तों की सुविधा की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा सके है।

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