बेमौसम बारिश ने उजाड़ी किसानों की मेहनत

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दो घंटे की आंधी-बारिश में बुरहानपुर जिले की फसलें तबाह, मक्का-गेहूं-चना ओर तरबूज़ की फसलें हुई बर्बाद
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर जिले में बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अचानक बदले मौसम ने जहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई किसानों की तैयार फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गईं।
तेज आंधी के साथ करीब दो घंटे तक हुई मूसलधार बारिश से जिले के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित रहा। शाहपुर लोनी, बिरोदा, बहादरपुर , ग्राम तुकईथड़ सहित कई गांवों से नुकसान की खबरें सामने आई हैं। तेज हवाओं के कारण कई मकानों की टिन शेड उड़ गईं।
 खेतों में डूबी फसल, किसानों पर सबसे बड़ा संकट
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। मक्का, चना और गेहूं की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। खेतों में पानी भर जाने से तैयार फसल सड़ने लगी है, जिससे किसानों के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
 बहादरपुर, लोनी, शाहपुर,  विरोदा,  तुकईथड़ के  हुकुमचंद , नरेंद्र कुमार महाजन, संदीप बडगुजर, अंकुश महाजन आदि किसानो ने दर्द बयां करते हुए कहा—
हमने खेती के लिए कर्जा लेकर बीज, खाद और दवाइयां डाली थीं। अब फसल पूरी तरह खराब हो गई है। समझ नहीं आ रहा कर्जा चुकाएं या घर चलाएं।
गांवों में मायूसी, मुआवजे की मांग
किसानों का कहना है कि अगर समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
दो घंटे की बारिश ने सालभर की मेहनत खत्म कर दी। मक्का और गेहूं सब पानी में डूब गया है। सरकार से तुरंत मुआवजा चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में निराशा और चिंता का माहौल है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल फसल सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।
सवाल बरकरार
फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि कब तक किसानों को राहत मिलेगी और क्या उनकी मेहनत की भरपाई हो पाएगी ?

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