“हम मजदूर हैं साहब, हर बार ‘अगला मंगलवार’ नहीं कर सकते”

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राजेश धाकड़
इंदौर। जनसुनवाई में आम जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासनिक दावों की हकीकत मंगलवार को एक बार फिर सामने आ गई। मेहनत-मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाले एक मजदूर की पीड़ा ने जनसुनवाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
मजदूर अपनी बुजुर्ग मां को लेकर जनसुनवाई में पहुंचा था। मां की आंखों की रोशनी लगातार कम होती जा रही है, वहीं राशन कार्ड से उनका नाम काट दिया गया है। मजदूर का कहना है कि वह सिर्फ अपनी मां का नाम दोबारा राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए हर मंगलवार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे आश्वासन के तौर पर सिर्फ “अगला मंगलवार” ही थमा दिया जाता है।
लगातार टालमटोल से परेशान मजदूर का सब्र मंगलवार को टूट गया। जनसुनवाई कक्ष में ही उसने हंगामा कर दिया, वहीं उसकी मां भी फूट-फूटकर रोती रही। मजदूर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं मेहनत-मजदूरी करने वाला इंसान हूं, रोज कमाता-खाता हूं। हर मंगलवार इस तरह काम छोड़कर चक्कर नहीं लगा सकता।”
हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और समस्या का जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया। हालांकि यह घटना जनसुनवाई की प्रभावशीलता और जमीनी स्तर पर आम आदमी को मिलने वाले न्याय पर गंभीर सवाल छोड़ गई।

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