राजनीतिक संत का माल्यार्पण कर गए लेकिन मंच से जिक्र करना उचित नहीं समझा

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हाटपीपल्या से संजय प्रेम जोशी की रिपोर्ट
 मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बागली की सभा में पहले मुख्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक सभा के लिए 1962 का जिक्र करते हुए केलाश कटाजु का नाम लिया जबकि क्षेत्र को पहचान दिलाने वाले राजनीतिक संत केलाश जोशी दिसंबर 1977 में मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए सार्वजनिक रूप से बागली आए तब उन्हें बागली के कार्यकर्ताओं ने अपनी गाड़ी कमाई से एकत्रित राशि से उपहार स्वरूप एम्बेसडर  कार भेटं की थी। मुख्यमंत्री मोहन यादवने पूरे 45 मिनिट के भाषण में स्थानीय विधायक मुरली भवंरा एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  ने संत राजनेता  केलाश जोशी का नाम एक बार भी नहीं लिया जो चर्चा का विषय रहा वही जटाशंकर से कांटा फोड़ मार्ग 17 किलोमीटर के नवीनतम निर्माण करने की बात कही लेकिन बागली के समीप काली सिंध नदी पर बने 120वर्ष पुराने रणजीत बधं के विषय में कोई घोषणा नहीं की जब की इसका बना बेहद जरूरीहोकर  अनिवार्य है। वर्तमानमें यह इतना छोटा पुल है कि बड़े वाहन इस पर से नहीं निकल पाते हैं इसके बने बगैर काटा फोड़ मार्ग एवं जटाशंकर  के विकास को पूर्ण नहीं माना जा सकता मंच पर भी केलाश जोशी का फोटो किसी भी फ्लेक्स बैनर में नहीं दिखाई दिया। पूर्व विधायको को मैं शामिल दीपक जोशी चंपालाल देवडा का नाम भी मचं से किसी भी जनप्रतिनिधि ने नहीं लेकर उन्हें दरकिनार किया जबकि पूरी बागली विधानसभा ऐसा बगीचा है। जिसे सीचंने में केलाश जोशी चंपालाल देवडा नंदू  कुमार सिंह चौहान एवं दीपक जोशी के कार्यों को और संगठन के प्रति लगन को भुलाया नहीं जा सकता। भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बागली ऐसे ही नहीं बना इसके लिए जमीनी कार्यकर्ता के रूप में जी लोगों ने यह कार्य किया उनका नाम मुख्यमंत्री जी शायद लेना नहीं चाहते थे या लेने नहीं दिया गया यहां चर्चा का विषय रहा।

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