”राष्ट्रसंत जब विश्वगौरव स्थापित हो तो निश्चित ही भारत विश्वगुरु  बनने के प्रगतिपथ पर अग्रसर है - डॉ भरत शर्मा”

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आदित्य शर्मा
इंदौर। श्री गजानन महाराज प्रकट उत्सव आज श्री दत्त माऊली सद्गुरु अन्ना महाराज संस्थान में संपन्न किया गया। सत्र की शुरुआत में 111 भक्तों द्वारा गजानन महाराज का पारायण श्री विजय ग्रंथ का पाठ किया ।
दोपहर 12:00 बजे परम पूज्य डॉक्टर अन्ना महाराज को थेम्स अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित करने पर अन्ना महाराज का नागरिक सम्मान शिष्य तथा भक्तों द्वारा आज संपन्न किया गया।
इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, विधायक श्रीमती मालीनि गोड, भारत शासन संस्कृति परिषद के श्री भरत शर्मा, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट तनुज दीक्षित, महामंडलेश्वर डॉक्टर चैतन्य स्वामी, रणजीत हनुमान के पंडित दीपेश व्यास, महा मंडलेश्वर डॉक्टर चैतन्य स्वामी अखंड धाम आश्रम के अन्य साधु संत श्री रामचंद्र वैदिक, महामंडलेश्वर योगेंद्र बाबा, श्री हरि अग्रवाल, पार्षद योगेंद्र ज
गेंदर , पार्षद सुरेश टकलकर , पार्षद श्री प्रशांत  बडवे  के साथ-साथ अन्य गणमान्य नागरिक और श्री सत्य साई सेवा समिति मध्य प्रदेश के श्री बोचरे साहब और डॉ माधवी पटेल ने भी महाराज जी का सम्मान किया।
उक्त अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा की सद्गुरु का यह सम्मान समाज कल्याण और प्रकृति संरक्षण की दिशा में किए गए उनके प्रयासों का परिणाम है। आपने बधाई देते हुए कहा कि जल्द ही केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी और प्रदेश के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में अन्ना महाराज जी का नागरिक अभिनंदन करेंगे।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य डॉ. भरत शर्मा ने गुरु को ज्ञान प्रदत्त करने वाला और भारत की संस्कृति में निहित अध्यात्म की महिमा से जनकल्याण की भावना के इस प्रसंग को प्रेरक प्रकल्प बताया और यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भारत को विश्वगुरु बनाने के प्रकल्प का सार्थक उदाहरण बताया।
विधायक और पूर्व महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ ने इसे राष्ट्रीय उपलब्धि बताते हुए सद्गुरु अन्ना महाराज को बधाई दी।
ज्योतिष के प्रकांड विद्वान रामचंद्र वैदिक और उच्चतम न्यायलय के अधिवक्ता तनुज दीक्षित ने भी बधाई प्रेषित की।
यह सम्मान  उनके कार्यों को देखते हुए बहुत बारीकी से सदगुरु अन्ना महाराज के प्रकल्पों की सार्थकता को रेखांकित कर भारत में २०२५ में चिह्नित कर दी गई ४ डॉक्ट्रेट उपाधियों  में से एक है।इस सम्मान ने संपूर्ण शहर के लोगों में एक विशेष आकर्षण महसूस किया गया ।

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