यंग इंडिया का 'छक्का': रिकॉर्ड 6वीं बार विश्व कप पर कब्जा, वैभव सूर्यवंशी के तूफान में उड़ा इंग्लैंड

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हरारे। भारत ने अंडर-19 विश्वकप का खिताब जीत लिया है। फाइनल में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 100 रन से हराया। यह टीम इंडिया का रिकॉर्ड छठा खिताब है। इससे पहले भारत ने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में अंडर-19 विश्व कप खिताब पर कब्जा जमाया था। भारत ने इंग्लैंड के सामने 412 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में इंग्लिश टीम 40.2 ओवर में 311 रन रन पर सिमट गई। टीम इंडिया के लिए वैभव सूर्यवंशी फाइनल के सुपरस्टार रहे। उन्होंने 80 गेंद में 175 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली। वहीं, इंग्लैंड की ओर से कैलब फाल्कनर ने शतक जड़ा, लेकिन टीम को नहीं जिता पाए। फाल्कनर ने 67 गेंद पर 115 रन की पारी खेली।
100 रन से जीत अंडर 19 विश्व कप फाइनल में रनों के अंतर से सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम था। उन्होंने 2024 में भारत को 79 रन से हराया था।
वहीं, 411 रन का स्कोर अंडर-19 विश्व कप और अंडर-19 विश्व कप फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर रहा। अंडर-19 विश्व कप में सबसे बड़े स्कोर के मामले में भारत ने इंग्लैंड का ही रिकॉर्ड तोड़ा। इंग्लैंड ने इसी विश्व कप में स्कॉटलैंड के खिलाफ छह विकेट पर 404 रन बनाए थे।
भारत अंडर-19 विश्व कप के प्लेऑफ मुकाबले में 350 से ज्यादा रन बनाने वाली पहली टीम बन गई। इससे पहले भी यह रिकॉर्ड भारत के ही नाम था। 2016 क्वार्टरफाइनल में नामीबिया के खिलाफ 349/6 रन बनाए थे, जब ऋषभ पंत ने 96 गेंदों में 111 रन की धमाकेदार पारी खेली थी।
अंडर-19 विश्व कप फाइनल में इससे पहले सबसे बड़ा स्कोर ऑस्ट्रेलिया का 253/7 था, जो उसने 2024 में भारत के खिलाफ बनाया था। भारत ने इस बार उस रिकॉर्ड को भी काफी पीछे छोड़ दिया।
यह भारत का अंडर-19 विश्व कप में तीसरा 400+ स्कोर है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की किसी और टीम ने इस टूर्नामेंट में एक से ज्यादा बार 400 रन का आंकड़ा नहीं छुआ।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही थी। 20 पर पहला झटका लगा था। एरॉन जॉर्ज नौ रन बनाकर आउट हुए थे। हालांकि, इसके बाद वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे ने इंग्लिश गेंदबाजों की बखिया उधेड़ कर रख दी। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 90 गेंद में 142 रन की साझेदारी निभाई।
म्हात्रे 51 गेंद में सात चौके और दो छक्कों की मदद से 53 रन बनाकर आउट हुए। वैभव ने 32 गेंद में अर्धशतक और 55 गेंद में शतक पूरा किया। फिर 71 गेंद में 150 रन बनाए। वह 80 गेंद में 15 चौके और 15 छक्कों की मदद से 175 रन बनाए। वैभव ने तीसरे विकेट के लिए वेदांत त्रिवेदी के साथ 39 गेंद में 89 रन की साझेदारी निभाई।
वैभव का विकेट 251 के स्कोर पर गिरा। इसके बाद भारत ने 160 रन बनाए और सात विकेट गंवाए। वेदांत ने 36 गेंद में 32 रन, विहान मल्होत्रा ने 36 गेंद में 30 रन की पारी खेली। वहीं, अभिज्ञान कुंडू ने 31 गेंद में 40 रन बनाए। आरएस अंबरीश 18 रन बना सके। वहीं, कनिष्क चौहान ने 20 गेंद में नाबाद 37 रन बनाए। खिलन पटेल तीन रन, हेनिल पटेल पांच रन बनाकर आउट हुए। इंग्लैंड की ओर से जेम्स मिंटो ने तीन विकेट लिए। वहीं, सेबास्टियन मॉर्गन और एलेक्स ग्रीन को दो-दो विकेट मिले। वहीं, मैनी लम्सडन को एक विकेट मिला।
जवाब में इंग्लैंड की भी शुरुआत खराब रही। 19 पर टीम को पहला झटका लगा। जोसेफ मूर्स 17 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद बेन डॉकिंस और बेन मायेस ने दूसरे विकेट के लिए 49 गेंद में 74 रन की साझेदारी निभाई। मायेस और डॉकिंस के आउट होते ही इंग्लैंड का मध्यक्रम लुढ़क गया। डॉकिंस ने 56 गेंद में सात चौके और दो छक्कों की मदद से 66 रन की पारी खेली। वहीं, मायेस 28 गेंद में सात चौके और दो छक्कों की मदद से 45 रन बनाकर आउट हुए।
कप्तान थॉमस रियू 18 गेंद में 31 रन बनाकर आउट हुए। राल्फी अल्बर्ट और सेबास्टियन मॉर्गन खाता नहीं खोल सके, जबकि फरहान अहमद एक रन बना सके। जेम्स मिंटो ने कैलब फाल्कनर के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए 80 गेंद में 92 रन की साझेदारी निभाई। मिंटो 28 रन बनाकर आउट हुए। फाल्कनर ने शतक लगाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
लम्सडेन तीन रन बनाकर आउट हुए। फाल्कनर आखिरी विकेट के रूप में पवेलियन लौटे। वह 67 गेंद में नौ चौके और सात छक्कों की मदद से 115 रन बना सके। भारत की ओर से आरएस अंबरीश ने तीन और दीपेश देवेंद्रन ने दो विकेट लिए। वहीं, कनिष्क चौहान को भी दो विकेट लिए। खिलन पटेल और आयुष म्हात्रे को एक-एक विकेट मिला।
साभार अमर उजाला

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