12% वैश्विक व्यापार दांव पर: लाल सागर में हूती विद्रोहियों की सक्रियता से समुद्री रास्तों पर मंडराया खतरा
नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुकी है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग में अब हूती की एंट्री हो गई है, जिसने पहली बार सीधे इजरायल की तरफ मिसाइल दागकर इस युद्ध को और बढ़ा दिया है. इस कदम ने न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी नए खतरे खड़े कर दिए हैं.
हूती विद्रोही पहले चार हफ्तों तक इस जंग से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन अब उन्होंने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है. यमन की राजधानी सना और देश के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाला यह समूह पहले भी गाजा युद्ध के दौरान इजरायल के खिलाफ हमले कर चुका है. हालांकि, उस समय इन हमलों से सीमित नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं और दांव कहीं ज्यादा बड़ा है.
असल खतरा सिर्फ इजरायल पर मिसाइल हमलों से नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों पर हूती की पकड़ से है. यमन लाल सागर और अदन की खाड़ी के तट पर बसा है और इसकी राजधानी सना हूतियों के नियंत्रण में है. इन्हीं दोनों सागर को जोड़ने वाला चोक पॉइंट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम है. यहां से करीब 12% वैश्विक व्यापार गुजरता है. अगर हूती इस जंग में एक्टिव रूप से शामिल होते हैं, बाब अल-मंदेब पर पाबंदियां लगाते हैं और जहाजों की आवाजाही रोकते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
हालात और ज्यादा गंभीर इसलिए हो जाता है क्योंकि पहले से ही हॉर्मुज स्ट्रेट पर संकट बना हुआ है. यह स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का सबसे अहम मार्ग है, जहां से करीब 20% तेल गुजरता है. अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों एक साथ प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन को दोहरा झटका लगेगा.
इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. अगर गल्फ देशों से तेल सप्लाई रुकती है, तो दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा. इसके अलावा जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से जाना पड़ेगा, जिससे कमोबेश दो हफ्ते ज्यादा लगेंगे और लागत भी काफी बढ़ जाएगी. यही लागत आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी.
साभार आज तक

