4 घंटे 16 मिनट का रोमांच: तीन बार फाइनल हारने के बाद आखिरकार ज्वेरेव के सिर सजा फ्रेंच ओपन का ताज
पेरिस। जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया है। फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष सिंगल्स फाइनल में दूसरी सीड ज्वेरेव का सामना इटली के फ्लेवियो कोबोली से हुआ। 5 सेट तक चले मुकाबले में 29 साल के ज्वेरेव ने 6-1, 4-6, 6-4, 6-7, 6-1 से अपने नाम किया। फाइनल मुकाबला 4 घंटे और 16 मिनट तक चला। खिताब जीतने के बाद ज्वेरेव की आंखों में आंसू थे। 24 साल के कोबोली का यह पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था।
10वीं सीड फ्लेवियो कोबोली के खिलाफ एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने पहले सेट को आसानी से 6-1 से जीत लिया। दूसरे सेट में कोबोली ने वापसी करते हुए जीत हासिल की। ज्वेरेव ने तीसरा सेट जीता लेकिन चौथे में कोबोली ने कड़ी टक्कर दी। टाई ब्रेकर को 7-5 से जीतकर इटैलियन खिलाड़ी ने यह सेट अपने नाम किया। आखिरी सेट के पहले ही गेम में ज्वेरेव ने कोबोली का सर्विस ब्रेक कर दिया। 2-0 की बढ़त लेने के बाद उन्होंने दूसरा सर्विस भी ब्रेक किया और कोबोली की उम्मीद पर पानी फेर दिया। अंत में उन्होंने सेट को 6-1 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।
अलेक्जेंडर ज्वेरेव फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने वाले ओपन एरा के पहले जर्मन खिलाड़ी हैं। 89 साल पहले आखिरी बार रोलैंड गैरोस का चैंपियन कोई जर्मन पुरुष खिलाड़ी बना था। तब हेनर हेन्केल ने 1937 में खिताब जीता था। अलेक्जेंडर ज्वेरेव से पहले बोरिस बेकर ग्रैंड स्लैम सिंगल्स का खिताब जीतने वाले आखिरी जर्मन खिलाड़ी थे। उन्होंने 1996 में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया था।
अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अभी तक हर बड़े इवेंट में जीत हासिल की थी। उनके नाम मास्टर्स 1000 इवेंट्स के साथ ही दो एटीपी फाइल्स की ट्रॉफी थी। टोक्यो में ज्वेरेव ने ओलंपिक गोल्ड भी जीता था लेकिन उनके खाते में ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं था। इससे पहले 2020 यूएस ओपन, 2024 फ्रेंच ओपन और 2025 ऑस्ट्रेलिया ओपन का खिताबी मुकाबला वह हार चुके थे।
टॉप-रैंक वाले यानिक सिनर को पहले हफ्ते में गर्मी और इंजरी की वजह से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। फिर 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच को भी हार के सामना करना पड़ा। तभी से ज्वेरेव को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। डिफेंडिंग चैंपियन कार्लोस अल्काराज इंजरी की वजह से इस टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे थे।
साभार नवभारत टाइम्स

