आदिवासी नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया के प्रतिमा स्थल पर लगा अनुयायियों का मेला

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 आदिवासी संस्कृति के अनुरूप पूजन कर स्वर्गीय भूरिया की प्रतिमा पर 30 मीटर का साफा बांधा 
 11वीं पुण्यतिथि पर उनके प्रतिमा स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे इनके अनुयाई 
 कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा-मेरे पिता एक सच्चे आदिवासी जननेता थे
 जनप्रतिनिधियों के साथ ही बड़ी संख्या में आम लोग पहुंचे प्रतिमा स्थल, प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि
रिपोर्टर :- सलीम हुसैन 
झाबुआ। कद्दावर आदिवासी नेता स्वर्गीय दिलीपसिंह भूरिया की 11वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को झाबुआ में उनके प्रतिमा स्थल पर। अनुयायियों का मेला लगा। इस दौरान सभी ने उनके द्वारा आदिवासी समाज के उत्थान के लिए दिए योगदान को शिद्दत से याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। परिवार के सदस्यों ने आदिवासी संस्कृति के अनुरूप पूजन कर प्रतिमा पर 30 मीटर का साफा बांधा। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा, भूरिया जी का नाम रहेगा, जैसे नारे भी लगाए गए।  दलगत राजनीति से परे जनप्रतिनिधि प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे तो वहीं आम लोगों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित कर स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया को याद किया। सुबह से ही प्रतिमा स्थल पर अन्युयायियो के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शाम तक अनवरत जारी रहा। सुबह करीब 10 बजे भाजपा नेताओं ने प्रतिमा पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। यहां उनकी बेटी और केबिनेट मंत्री  निर्मला भूरिया भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पहुंची। इस मौके पर उन्होंने कहा-महान व्यक्तित्व कभी विदा नहीं होते, वे अपनी प्रेरणा और यश के रूप में सदैव हमारे बीच बने रहते हैं।
मेरे परम पूज्य पिताजी स्व. श्री दिलीप सिंह भूरियाजी जो कि पूर्व सांसद एवं भारत सरकार में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भी रहे. उनकी विकासात्मक दूर दृष्टि ने आदिवासी हितों को नई आवाज़ व पहचान दी।वे आखिरी सांस तक देशभर के आदिवासियों के अधिकार के लिए संघर्ष करते रहे। पेसा एक्ट के जनक मेरे आदर्श पिताश्री स्व. श्री दिलीप सिंह भूरिया जी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर मैं उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ।
भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया ने कहा- स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया आदिवासियों की आवाज थे। आज निसंदेह इस क्षेत्र के लिए उन्होंने जो कार्य किए वो कल्पना से परे हैं। उनके द्वारा किए कार्य के लिए झाबुआ ही नहीं प्रदेश और देश में उन्हें याद किया जाता है। पेसा कानून बनाकर उन्होंने आदिवासियों के हित के लिए काम किया। वरिष्ठ आदिवासी नेता श्यामा ताहेड ने कहा स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया हम सभी के लिए श्रद्धेय हैं। उन्होंने ने अपने जीवन में कठिनाई और विरोधों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। सरकार का विरोध भी झेला लेकिन आदिवासियों के हित के लिए खड़े रहे। ऐसे नेता न पहले कभी हुए और न भविष्य में होंगे। 
 आयोजन में भाजपा  प्रदेश प्रवक्ता कलसिंह भाबर, पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, बालू भूरिया, श्यामा ताहेड़, रमेश सोलंकी, अजमेर सिंह भूरिया, हेमंत भट्ट, योगेश गामड़, विकास गामड़, मंडल अध्यक्ष करन अमलियार, संजय कहार, पप्पू लाल गामड़, सोमसिंह सोलंकी, विनोद पुरोहित,प्रवीण सुराणा,विजय नायर, नपाध्यक्ष प्रतिनिधि बिट्टू सिंगार, नगर पालिका उपाध्यक्ष लाखन सिंह सोलंकी मनोहर भटेवरा, नवीनचंद्र सिंह बोधायता, जितेंद्र मेहता,सहित बड़ी संख्या में अलग अलग राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।

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