बाह्य व आंतरिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य का साधन - सहजयोग ध्यान
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा वर्ष 1970 में स्थापित सहजयोग ध्यान पद्धति आज विश्व के लगभग 140 देशों में लाखों साधकों के जीवन में आत्मिक जागरण, आंतरिक शांति और संतुलन का माध्यम बन चुकी है। कुछ साधकों के साथ प्रारंभ हुई यह आध्यात्मिक यात्रा आज एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुकी है। सहजयोग सनातन संस्कृति की मूल भावना पर आधारित है तथा विश्व के सभी प्रमुख धर्मों एवं आध्यात्मिक परंपराओं के सार्वभौमिक सिद्धांतों को अपने भीतर समाहित करता है।
सहजयोग क्या है?
सहजयोग एक सरल, सहज एवं अनुभव-आधारित ध्यान पद्धति है, जिसके माध्यम से कुण्डलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार की प्राप्ति होती है। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात नियमित ध्यान के माध्यम से शरीर में स्थित सूक्ष्म चक्रों एवं नाड़ियों का संतुलन स्थापित होता है। यही संतुलन व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनता है।
जब मनुष्य अपने भीतर स्थित आत्मा के प्रकाश का अनुभव करता है, तब उसके विचार, व्यवहार और जीवन-मूल्यों में बिना किसी बाहरी दबाव या उपदेश के स्वाभाविक परिवर्तन आने लगता है। सही और गलत का विवेक सहज रूप से विकसित होता है। जैसे-जैसे साधक ध्यान में परिपक्व होता है, प्रेम, करुणा, आनंद और संतोष के वास्तविक अर्थ उसके जीवन में प्रकट होने लगते हैं। अभाव, भय, तनाव और नकारात्मकता का प्रभाव स्वतः कम होने लगता है।
सहजयोग न तो कोई बौद्धिक सिद्धांत है और न ही मात्र एक ध्यान तकनीक, बल्कि यह मनुष्य की अंतर्निहित दिव्य शक्तियों के जागरण तथा स्थूल एवं सूक्ष्म शरीर के मध्य संतुलन स्थापित करने का एक वैज्ञानिक एवं अनुभवजन्य माध्यम है।
सहजयोग आत्मा के परमात्मा से एकत्व की प्रक्रिया है। शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य इस आध्यात्मिक प्रक्रिया के स्वाभाविक परिणाम हैं। आत्मसाक्षात्कार के लिए न तो किसी विशेष आयु की आवश्यकता है और न ही सांसारिक जीवन का त्याग करना पड़ता है। यदि बाल्यावस्था से ही बच्चों को सहजयोग का अभ्यास कराया जाए, तो उनमें एकाग्रता, अनुशासन, तीव्र स्मरणशक्ति, नैतिक मूल्यों एवं व्यक्तित्व का संतुलित विकास सहज रूप से होने लगता है। वे शिक्षा, व्यवसाय तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम बनते हैं तथा विपरीत परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों से विचलित नहीं होते।
सहजयोग पूर्णतः निःशुल्क, आडंबर एवं कर्मकांड से रहित, वैज्ञानिक एवं अनुभव-आधारित ध्यान प्रणाली है। इसमें किसी भी सिद्धांत को मानने से पहले साधक स्वयं सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव करता है और उसके पश्चात ही इस ज्ञान को अपने जीवन में अपनाता है।
अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 या वेबसाइट sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

