स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही से प्रसूता स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही से प्रसूता की मौत का आरोप
आदिवासी समाज ने शव रखकर किया चक्काजाम
राजेश धाकड़
बलवाड़ा/खरगोन। जिला खरगोन के बलवाड़ा स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा होने पर सपना आदिवासी नामक महिला अपने पति के साथ उपचार एवं डिलीवरी के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र बलवाड़ा पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर उचित उपचार नहीं किया और ना ही मरीज को अन्य बड़े अस्पताल रेफर करने के लिए एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई।
परिजनों ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यहां डिलीवरी संभव नहीं है, जिसके चलते समय पर उपचार नहीं मिल सका। इलाज में देरी और लापरवाही के कारण सपना आदिवासी की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार सहित आदिवासी समाज में भारी आक्रोश फैल गया।
मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समाजजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इसके बाद गुस्साए लोगों ने मृतका का शव खंडवा रोड पर रखकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई, मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। मौके पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया।
काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और एंबुलेंस सुविधा मिल जाती, तो सपना आदिवासी की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी बनी हुई है।की मौत का आरोप, आदिवासी समाज ने शव रखकर किया चक्काजाम
बलवाड़ा/खरगोन। जिला खरगोन के बलवाड़ा स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा होने पर सपना आदिवासी नामक महिला अपने पति के साथ उपचार एवं डिलीवरी के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र बलवाड़ा पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर उचित उपचार नहीं किया और ना ही मरीज को अन्य बड़े अस्पताल रेफर करने के लिए एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई।
परिजनों ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यहां डिलीवरी संभव नहीं है, जिसके चलते समय पर उपचार नहीं मिल सका। इलाज में देरी और लापरवाही के कारण सपना आदिवासी की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार सहित आदिवासी समाज में भारी आक्रोश फैल गया।
मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समाजजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इसके बाद गुस्साए लोगों ने मृतका का शव खंडवा रोड पर रखकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई, मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। मौके पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया।
काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और एंबुलेंस सुविधा मिल जाती, तो सपना आदिवासी की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी बनी हुई है।

