BHMS डॉक्टरों द्वारा कथित एलोपैथिक उपचार पर उठे सवाल, स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग
पत्रकार :- खुशबू श्रीवास्तव
इंदौर। शहर के कुछ निजी क्लीनिकों में चिकित्सकों की योग्यता, पंजीकरण और मरीजों को दी जा रही उपचार पद्धति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों में दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर
BAMS — आयुर्वेद।
BHMS — होम्योपैथी।
BUMS — यूनानी चिकित्सा।
BSMS — सिद्ध चिकित्सा
अथवा अन्य पैथी से संबंधित योग्यता रखने वाले चिकित्सकों द्वारा मरीजों को कथित तौर पर आधुनिक चिकित्सा पद्धति की दवाएं, इंजेक्शन अथवा IV बॉटल जैसी उपचार प्रक्रियाएं कराई जा रही हैं।
National Commission for Homoeopathy Act, 2020 और उससे संबंधित नियम होम्योपैथी चिकित्सकों के पंजीकरण एवं पेशेवर आचरण को विनियमित करते हैं। दूसरी ओर, आधुनिक चिकित्सा का अभ्यास करने वाले चिकित्सकों के लिए National Medical Commission के पंजीकरण और पेशेवर आचरण संबंधी प्रावधान लागू होते हैं।
ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि संबंधित क्लीनिकों में उपचार करने वाले चिकित्सक किस चिकित्सा पद्धति में पंजीकृत हैं और मरीजों को दी जा रही उपचार पद्धति उनके वैध पंजीकरण एवं लागू नियमों के अनुरूप है या नहीं।
IV बॉटल और इंजेक्शन को लेकर भी जांच जरूरी
स्थानीय स्तर पर कुछ क्लीनिकों में मरीजों को इंजेक्शन तथा IV बॉटल लगाए जाने के दावे सामने आए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह जांच किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित संस्थान के पास क्लीनिकल संचालन के लिए आवश्यक पंजीकरण, अनुमति, प्रशिक्षित स्टाफ, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
पूर्व कार्रवाई के बाद दोबारा संचालन का सवाल
यदि किसी क्लीनिक के विरुद्ध पूर्व में कार्रवाई हुई है और उसके बाद दोबारा संचालन की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड की जांच और निरीक्षण के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। सवाल यह भी है कि पूर्व कार्रवाई के बाद अनुपालन की निगरानी किस स्तर पर की गई।
स्वास्थ्य विभाग से प्रमुख सवाल
क्या संबंधित क्लीनिकों का पंजीकरण और लाइसेंस जांचा गया है?
चिकित्सकों का संबंधित चिकित्सा पद्धति में वैध पंजीकरण है या नहीं?
BHMS चिकित्सक द्वारा आधुनिक चिकित्सा पद्धति अपनाए जाने की शिकायतों की विभागीय जांच हुई है या नहीं?
इंजेक्शन और IV उपचार की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं एवं अनुमति मौजूद हैं या नहीं?
पूर्व में कार्रवाई किए गए क्लीनिकों का दोबारा निरीक्षण किया गया या नहीं?
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों की जांच कर तथ्यों की पुष्टि करता है या नहीं। यदि निरीक्षण में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

