अनहद (हृदय) चक्र : निस्वार्थ प्रेम, निर्भयता और आत्मविश्वास का केंद्र

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मानव के सूक्ष्म शरीर में स्थित सात प्रमुख चक्रों में चौथा चक्र अनहद या हृदय चक्र कहलाता है। यह उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे, मेरूरज्जु के स्तर पर स्थित है तथा इसकी बारह पंखुड़ियाँ मानी गई हैं। सहजयोग के अनुसार बाल्यावस्था में यह चक्र शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और शरीर को विभिन्न प्रकार के आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होता है।
     हृदय चक्र केवल शारीरिक स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का भी आधार है। यह चक्र तीन भागों—दायाँ, बायाँ और मध्य—में कार्य करता है, जिनका अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है।
दायाँ हृदय : श्रीराम का आदर्श
हृदय चक्र के दाएँ भाग में श्रीराम का स्थान माना गया है। श्रीराम मर्यादा, उत्तरदायित्व और आदर्श पितृत्व के प्रतीक हैं। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में पिता से जुड़ी पीड़ा, दूरी या मानसिक असंतुलन हो, तो इसका प्रभाव दाएँ हृदय पर पड़ सकता है। सहजयोग में श्रीराम के ध्यान द्वारा इस पक्ष को संतुलित करने का मार्ग बताया गया है।
बायाँ हृदय : मातृत्व और शिव तत्व
हृदय चक्र का बायाँ भाग मातृत्व, करुणा और भावनात्मक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। जब किसी व्यक्ति के जीवन में मातृत्व से संबंधित भावनात्मक आघात, असुरक्षा या गहरे मानसिक तनाव उत्पन्न होते हैं, तो उनका प्रभाव इस केंद्र पर देखा जा सकता है।
सहजयोग में बाएँ हृदय चक्र में श्री शिव का स्थान तथा हृदय में आत्मस्वरूप श्री सदाशिव का वास बताया गया है। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात साधक अपने भीतर स्थित इसी दिव्य चेतना का अनुभव करने लगता है।
मध्य हृदय : देवी जगदम्बा की करुणा
हृदय चक्र का मध्य भाग साक्षात देवी जगदम्बा का स्थान माना गया है। जब यह केंद्र असंतुलित होता है, तो व्यक्ति भय, असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी का अनुभव कर सकता है। किंतु इसके जागृत होने पर भीतर धैर्य, साहस, विश्वास और निर्भयता का संचार होता है।
आत्मसाक्षात्कार के बाद जब यह चक्र प्रकाशित होता है, तब साधक के भीतर सुरक्षा की गहरी अनुभूति जागृत होती है। वह निडर, ओजस्वी तथा आत्मविश्वास से परिपूर्ण होकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनता है। साथ ही, हृदय में निस्वार्थ प्रेम, करुणा और सहज स्नेह का प्रवाह विकसित होता है। सहजयोग के अनुसार कुण्डलिनी दिव्य शक्ति है और चक्र आध्यात्मिक विकास की सीढ़ियाँ हैं। इन सभी चक्रों के संतुलन और जागरण के माध्यम से साधक अंततः हृदय में स्थित शिव तत्व का अनुभव करता है। हृदय चक्र की शुद्धता और जागृति से जीवन में प्रेम, संतुलन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक आनंद का विकास होता है।
सहजयोग पूर्णतः निःशुल्क है और अत्यंत सरल भी। निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 पर संपर्क करें।

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