काशी में देवी अहिल्या की विरासत पर चला बुलडोजर,  इंदौर में भारी आक्रोश; प्रधानमंत्री से जांच की मांग

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सह संपादक- रंजीत टाइम्स
वाराणसी/इंदौर: काशी के मणिकर्णिका घाट पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक धरोहर के एक हिस्से को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना को लेकर इंदौर सहित देशभर के विभिन्न समाजों में गहरा रोष है। 'खासगी ट्रस्ट' के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
​क्या है पूरा मामला?
​वाराणसी (काशी) के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और 'कायाकल्प' के नाम पर वहां मौजूद प्राचीन निर्माणों को हटाया जा रहा है। इसी कड़ी में अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित विरासत को भी नुकसान पहुँचाया गया है। बताया जा रहा है कि 1771 में देवी अहिल्या ने इस घाट का जीर्णोद्धार कराया था और 1791 में यहां ऐतिहासिक धरोहरों का निर्माण हुआ था। मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में से एक है और इसका धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व अत्यंत अधिक है।


​इंदौर में रणनीति तैयार, कल बड़ी बैठक
​इस घटना की खबर मिलते ही इंदौर में अहिल्या प्रेमी और विभिन्न समाजों के लोग लामबंद हो गए हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि विकास के नाम पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटाया जाना असहनीय है।
​बैठक का आयोजन: कल (15 जनवरी) धनगर समाज, पाल, बघेल सहित करीब 15 समाजों की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है।
​विरोध की रणनीति: इस बैठक में प्रशासन के इस कदम के खिलाफ आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
​खासगी ट्रस्ट ने उठाए सवाल
​खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उन्हें विरासत को सुरक्षित रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि:
​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस लापरवाही की जांच कराएं।
​दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
​क्षतिग्रस्त मूर्तियों और धरोहरों को सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाए।

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