बुरहानपुर: प्यासे ग्रामीण और सोता प्रशासन; कलेक्टर के आदेशों को ठेंगे पर रख रहा पीएचई विभाग
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तपती धूप में मीलों भटकने को मजबूर हैं, वहीं जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी अपने वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर आराम फरमा रहे हैं। मामला खकनार ब्लॉक के ग्राम जामुनिया के ध्यानसिंग फलिया का है, जहां जल संकट अब विकराल रूप ले चुका है।
कलेक्टर के निर्देश 'कागजी', धरातल पर प्यास का कब्जा
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ही कलेक्टर श्री सिंह ने पीएचई विभाग को सख्त निर्देश दिए थे कि पेयजल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण किया जाए और जल संबंधी शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित हो। कलेक्टर की मंशा थी कि गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पानी के लिए परेशान न होना पड़े। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पीएचई विभाग के अधिकारी 'टस से मस' नहीं हो रहे हैं। विभाग की सुस्ती और महज कागजों तक सीमित कार्रवाई ने ग्रामीणों को बेहाल कर दिया है। ग्राम जामुनिया के ध्यानसिंग फलिया में एक महीने से ट्यूबवेल बंद पड़ा है। लोग पानी को तरस रहे है। पीएचई विभाग के अधिकारीयो द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
चंदा इकट्ठा कर खुद मैकेनिक बने ग्रामीण
प्रशासन की अनदेखी का आलम यह है कि ग्राम जामुनिया के ध्यानसिंग फलिया के ग्रामीणों ने अब सरकारी मदद की उम्मीद छोड़ दी है। ग्रामीण राम सिंह ने बताया कि
"हमने हार मानकर गांव के हर घर से 50-50 रुपये का चंदा इकट्ठा किया। खुद मैकेनिक बुलाया, पाइप डलवाए और मजदूरी दी। लेकिन इसके बावजूद हैंडपंप से पानी नहीं निकल पाया। नए ट्यूबवेल और हैंडपंप शुरू करवाने के लिए तरस रहे है ग्रामीण।
दफ्तरों में बैठे अधिकारियों को नहीं दिख रहा ग्रामीणों का दर्द
ग्राम पंचायत जामुनिया के ध्यानसिंग फलिया की महिलाएं और बुजुर्ग कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग को कई बार सूचना दी गई, लेकिन विभाग केवल फाइलों को इधर-से-उधर करने में लगा है। अधिकारियों की इस कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है।
मुख्य समस्याएं जो प्रशासन को नहीं दिख रहीं
एक महीने से सूखे हैंडपंप: गांव के जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं।
दूरी की मार: ग्रामीणों को 2-3 किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ रहा है।
विभागीय लापरवाही: कलेक्टर के आदेश के बावजूद शिकायतों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा।
जामुनिया के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पीएचई विभाग ने अपनी कुंभकर्णी नींद त्याग कर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी इन सुस्त मातहतों पर कोई कार्रवाई करते हैं या ग्रामीण इसी तरह प्यासे मरते रहेंगे।

