होलकर साइंस कॉलेज में बवाल: 7 छात्र निलंबित, FIR के विरोध में सड़क पर उतरी करणी सेना
माँ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह गौतम सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे; निष्पक्ष जांच की मांग
इंदौर। शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में गणेश विसर्जन चल समारोह के दौरान छात्रों के दो गुटों के बीच हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन द्वारा सात विद्यार्थियों को निलंबित करने और पुलिस में FIR दर्ज होने के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में करणी सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता होलकर साइंस कॉलेज पहुंचे।
प्रदर्शन में माँ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह गौतम, जिला अध्यक्ष बाला ठाकुर तथा करणी सेना सनातन प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी गोपाल गावंडे सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कॉलेज परिसर में दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने और नारेबाजी के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। बाद में विरोध प्रदर्शन एबी रोड तक पहुंचा और चक्काजाम की स्थिति बनी।
आखिर कार्रवाई एक पक्ष पर ही क्यों? — करणी सेना
करणी सेना का आरोप है कि गणेश विसर्जन के दौरान हुआ विवाद दो छात्र गुटों के बीच था, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई कथित रूप से एकतरफा की।
माँ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह गौतम ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने ABVP के दबाव में एकतरफा कार्रवाई करते हुए सात विद्यार्थियों को निलंबित किया। उनका कहना है कि वे इसी कार्रवाई का विरोध करने प्राचार्य से मिलने पहुंचे थे।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विवाद में दोनों पक्ष शामिल थे तो बिना पूरी और निष्पक्ष जांच के चुनिंदा छात्रों के खिलाफ ही FIR और कॉलेज से निलंबन जैसी कार्रवाई क्यों की गई?
प्रदर्शनकारी पक्ष का आरोप है कि ABVP से जुड़े जिन छात्रों की भूमिका घटना में बताई जा रही है, उनके खिलाफ समान कार्रवाई नहीं की गई। उनकी मांग है कि उपलब्ध CCTV फुटेज, वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके संगठन की परवाह किए बिना समान कार्रवाई हो।
सात छात्रों पर कॉलेज की कार्रवाई
कॉलेज प्रशासन ने अनुशासन समिति की कार्रवाई के बाद हर्ष तिवारी, अभिजीत सिंह राजपूत, संस्कार यादव, हरिओम खाती, अर्पित खाती, भावन सिंह राजपूत और सत्यम शर्मा को निलंबित किया है। कॉलेज परिसर में उनके प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है और उनके TC घर भेजने का निर्णय लिया गया है।
कॉलेज प्राचार्या डॉ. अनामिका जैन का कहना है कि मारपीट में शामिल पाए गए विद्यार्थियों पर अनुशासन समिति ने कार्रवाई की है। उनके अनुसार निलंबन वापस लेने का निर्णय वे अकेले नहीं ले सकतीं।
रणजीत टाइम्स का सवाल—जब विवाद दो पक्षों का, तो जांच भी दोनों पक्षों की हो
रणजीत टाइम्स का मानना है कि इतने गंभीर मामले में किसी भी छात्र के भविष्य पर अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी घटना की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जब उपलब्ध रिपोर्टों में घटना को करणी सेना और ABVP से जुड़े छात्र गुटों के बीच विवाद बताया जा रहा है, तब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस छात्र की क्या भूमिका थी और किस साक्ष्य के आधार पर किसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
यदि किसी पक्ष का आरोप है कि उसके छात्रों पर कार्रवाई हुई जबकि दूसरे पक्ष से जुड़े छात्रों की भूमिका की समान रूप से जांच नहीं हुई, तो प्रशासन और पुलिस को इस सवाल का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने रखकर जांच की जाए। दोषी चाहे किसी भी संगठन से जुड़ा हो, कार्रवाई समान हो; और यदि कोई छात्र निर्दोष है तो उसके भविष्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
सवाल संगठन का नहीं, निष्पक्ष न्याय का है।
— रणजीत टाइम्स, इंदौर

