पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कोहराम: झड़प में 11 मरे, इंटरनेट बंद; भारत बोला- अवैध कब्जा खाली करो

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मुजफ्फराबाद/लाहौर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जेएएसी कार्यकर्ता की गोलीबारी में मौत के बाद हिंसा भड़क गई। रावलकोट व आसपास में प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों में हुई झड़प में 11 लोग मारे गए, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हो गए। यह झड़प मंगलवार को जेएएसी की तरफ से प्रस्तावित लॉकडाउन से पहले हुई।
पुलिस ने बताया कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रदर्शनकारी एक अस्पताल की मॉर्चरी के बाहर जमा हुए थे। वहां समूह के एक सदस्य का शव लाया गया था जिसकी मौत पुलिस की फायरिंग में हुई थी।
पुंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने बताया, प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिस अधिकारी और एक राहगीर की मौत हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक ने बताया कि रविवार की घटना में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
जेएएसी ने क्षेत्रीय विधानसभा के लिए 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के विरोध में मंगलवार को लॉकडाउन का आह्वान किया है। विधानसभा की 45 में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जिनका दुरुपयोग किया जाता है। इन सीटों पर स्थानीय लोगों के बजाय पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों के लोगों को नामित कर दिया जाता है।
क्षेत्रीय सरकार ने शुक्रवार को जेएएसी को आतंकरोधी कानून के तहत एक प्रतिबंधित समूह घोषित कर दिया था। सरकार ने घरेलू व विदेशी पर्यटकों को 9 जून से पहले इलाका छोड़ने की सलाह दी है। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में किसी भी चुनाव का पुरजोर विरोध किया है। नई दिल्ली ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हमारा है। पाकिस्तान अवैध कब्जा जल्द खाली करे।
मीर...जेएएसी नेता शौकत मीर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, सरकार ने रावलकोट में लोगों का कत्लेआम शुरू कर दिया है। उन्होंने संकल्प लिया कि लॉकडाउन में उनका ग्रुप एकजुट रहेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने कब्जे वाले कश्मीर में टेलीफोन व इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती कर दी गई है। इनमें संघीय पुलिस बल व पाकिस्तानी रेंजर्स शामिल हैं।
स्थानीय लोग सरकारी दमन की घटनाओं, बिजली की भारी कमी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और इस क्षेत्र को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर लंबे समय से क्रोधित हैं।
साभार अमर उजाला

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