दावों की खुली पोल: खकनार में दिव्यांग उपकरण शिविर हुआ 'फ्लॉप शो', विभाग की लापरवाही से खाली हाथ लौटे ग्रामीण
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
खकनार (बुरहानपुर) :- सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की घोर लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली का एक बड़ा नमूना सोमवार, 29 जून 2026 को खकनार ब्लॉक में देखने को मिला। भारत सरकार की 'एडिप' योजना के तहत एलिम्को (ALIMCO) टीम के माध्यम से दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बांटने के लिए जो 'असेसमेंट शिविर' लगाया गया था, वह प्रशासनिक सुस्ती और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। जिस शिविर से सैकड़ों दिव्यांगों को लाभ मिलना था, वहां विभाग की नाकामी के चलते एलिम्को टीम द्वारा सिर्फ 7 पात्र दिव्यांगों का ही चयन किया जा सका।
साढ़े तीन घंटे लेट पहुंचा मेडिकल बोर्ड, डॉक्टरों की मनमानी
शिविर में व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ती साफ देखी गईं। नियमानुसार, जिला मेडिकल बोर्ड के विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को सुबह 10:00 बजे शिविर स्थल पर उपस्थित होना था। लेकिन, डॉक्टरों ने अपनी मर्जी चलाते हुए दिव्यांगों को कड़कती धूप और इंतजार में छोड़ दिया।
लापरवाही का आलम: मेडिकल बोर्ड की टीम सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर लगभग 1:30 बजे शिविर स्थल पहुंची। हद तो तब हो गई जब इस टीम में से भी कई महत्वपूर्ण डॉक्टर नदारद (अनुपस्थित) थे।
हवा-हवाई साबित हुआ प्रचार-प्रसार, खाली कुर्सियां देती रहीं गवाही
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निकाय प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि दूर-दराज के दिव्यांगजन इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा शिविर स्थल पर दिव्यांगों के लिए समुचित व्यवस्थाएं करने को कहा गया था।
लेकिन खकनार ब्लॉक की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। निकाय प्रमुख और स्थानीय प्रशासन ने प्रचार-प्रसार की कोई पुख्ता प्लानिंग ही नहीं की। नतीजा यह हुआ कि इतनी सारी पंचायतों वाले इस ब्लॉक में अनुमानित संख्या के मुकाबले नाममात्र के ग्रामीण पहुंचे। ग्रामीणों तक सूचना ही नहीं पहुंची, जिसके कारण शिविर स्थल सूना नजर आया।
UDID कार्ड का संकट: बिना प्लानिंग के लगा दिया शिविर
शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट और स्मार्ट फोन जैसी जरूरी चीजें देना था। लेकिन विभाग ने बिना किसी पूर्व योजना (प्रॉपर प्लानिंग) के यह शिविर आयोजित कर दिया। शिविर में पहुंचे कई ग्रामीणों के पास यूडीआईडी (UDID) कार्ड ही नहीं थे।
विभाग की बड़ी सुस्ती:
विभाग को शिविर से पहले ही खकनार ब्लॉक के छूटे हुए दिव्यांगों के यूडीआईडी कार्ड बनाकर तैयार रखने चाहिए थे।
वर्तमान में इस ब्लॉक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के कार्ड नहीं बने हैं।
बिना कार्ड के पहुंचे कई दिव्यांगों को पात्रता न मिलने के कारण मायूस होकर बैरंग (वापिस) लौटना पड़ा।
निष्कर्ष: उद्देश्य से भटका 'सामाजिक न्याय' विभाग
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि विभाग ने केवल कागजी खानापूर्ति के लिए इस शिविर का आयोजन किया था। चयनित लोगों को सही तरीके से शिविर तक पहुंचाने और उनकी जरूरी कागजी औपचारिकताएं पहले पूरी करने में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग पूरी तरह नाकाम रहा। महज 7 लोगों के चयन के साथ खकनार ब्लॉक में आयोजित इस शिविर का जो मुख्य उद्देश्य था, उसकी पूर्ति रत्ती भर भी नहीं हो सकी। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या गाज गिरती है।

