शिव की आराधना में हृदय की स्वच्छता और विशालता आवश्यक है
शिव तत्व को समझने का प्रयास हमें अपने भीतर स्थित आत्मतत्व की ओर ले जाता है। सहजयोग ध्यान पद्धति की प्रवर्तक परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के प्रवचनों में शिव तत्व और अबोधिता का अत्यंत सुंदर आध्यात्मिक विवेचन मिलता है।
श्री माताजी के अनुसार, शिव ही जीव में प्राण अथवा आत्मा के रूप में विद्यमान हैं। शरीर के अनेक अंगों में गंभीर क्षति होने के बावजूद मनुष्य का जीवन बना रह सकता है, लेकिन जिस क्षण हृदय की धड़कन रुक जाती है, जीवन का अंत हो जाता है। इस दृष्टि से हृदय को केवल शरीर का एक अंग मानना पर्याप्त नहीं है, यह हमारे भीतर स्थित आत्मतत्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
यही कारण है कि मनुष्य के लिए शिव तत्व को जानना और अपने आत्मस्वरूप को पहचानना अत्यंत आवश्यक है। शिव तत्व की विशेषता अबोधिता है। अबोधिता का अर्थ केवल भोलापन नहीं, बल्कि सरलता, निष्कपटता और मंगलमयता भी है। यह ऐसी आंतरिक अवस्था है, जिसमें मनुष्य छल-कपट, अहंकार और अनावश्यक चतुराई से ऊपर उठकर अपने वास्तविक स्वरूप के निकट पहुंचता है।
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के विचारों से स्वाभाविक जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि आखिर आत्मतत्व क्या है और इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है। आत्मतत्व अर्थात हमारी आत्मा का संबंध हृदय से माना गया है। इसलिए हृदय की स्वच्छता और विशालता, दोनों ही आध्यात्मिक जीवन के लिए आवश्यक हैं।
सहजयोग ध्यान के माध्यम से जब साधक अपने हृदय की ओर ध्यान करता है, तो वह अपने अंतरतम में आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ता है। इस अवस्था में एक सरल और पवित्र भाव के साथ प्रार्थना की जाती है—“मैं एक पवित्र आत्मा हूँ।” यह भाव साधक को बाहरी पहचान से ऊपर उठाकर उसके वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप से जोड़ने में सहायक बनता है।
जब मनुष्य अपने भीतर की सहजता और निर्मलता को विकसित करता है, तो उसके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। सहजयोग ध्यान के माध्यम से वह अपने भीतर स्थित शिव तत्व की अनुभूति की दिशा में आगे बढ़ता है और अपने चारों ओर व्याप्त ईश्वरीय शक्ति से एकाकारिता का अनुभव करता है।
आत्मसाक्षात्कार केवल किसी विचार को स्वीकार कर लेने का विषय नहीं, बल्कि अपने भीतर उस सत्य की अनुभूति करने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। सहजयोग इसी आंतरिक अनुभूति की ओर मनुष्य को सहज और सरल मार्ग से ले जाने का प्रयास करता है। अपने आत्मस्वरूप को जानने हेतु सहजयोग ध्यान से जुड़कर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा वेबसाइट sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

