ट्रैफिक आरक्षक पर मारपीट और बंधक बनाने के आरोप, कोर्ट ने लिया संज्ञान; समन जारी
राजेश धाकड़
इंदौर। करीब ढाई वर्ष पुराने एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) ने यातायात पुलिस के आरक्षक संजय उईके के खिलाफ मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए समन जारी करने के आदेश दिए हैं।
प्रकरण में परिवादी की ओर से अधिवक्ता दीपक चौहान एवं मानसी जैन पाटोदी ने पैरवी की।
परिवादी विशाल पिता लेखराज बाघमारे की ओर से दायर परिवाद में बताया गया कि 18 दिसंबर 2023 को वह आरोपी आरक्षक के रिश्तेदारों को उज्जैन दर्शन कराने गए थे। रास्ते में वाहन खराब होने पर उन्होंने इसकी सूचना आरोपी को दी। आरोप है कि आरोपी ने वाहन ठीक होने के बाद एमटीएच कम्पाउंड स्थित यातायात थाने आने, वाहन वहीं खड़ा करने तथा मेहनताना वहीं देने की बात कही।
परिवाद के अनुसार, जब विशाल यातायात थाने पहुंचे तो आरोपी आरक्षक एवं उसके साथियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उन्हें करीब तीन घंटे तक एक कमरे में बंधक बनाकर मारपीट की गई, गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
घटना के बाद परिवादी ने पुलिस आयुक्त सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली। विभागीय जांच, मेडिकल रिपोर्ट तथा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामला विचारणीय मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 323, 342 एवं 506(2) के तहत संज्ञान लेकर आरोपी को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी करने के आदेश दिए।
इस प्रकरण में अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता, हितेश शर्मा एवं खुशबू राठी बहेती सहयोगी अधिवक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

