शक्ति की भक्ति में डूबे श्रद्धालु

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छुरा। कुँवार नवरात्रि पर्व के साथ ही माता की स्तुति, आराधना से वातावरण भक्तिमय हो गया है। देवी मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलशों की बढ़ती संख्या श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास को दर्शाती है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, विदेशों में रहने वाले भक्तगण भी माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जय मां महामाया सेवा परिवार छुरा माता की सेवा, जसगीत गायन और भक्तिमय प्रस्तुतियों में पूरी श्रद्धा के साथ जुटा हुआ है। देवी मंदिरों तथा घरों में विराजित जग ज्योति जवारा स्थलों पर समिति के सदस्य पारंपरिक जसगीतों और सेवा गीतों के माध्यम से माता का गुणगान कर रहे हैं। समिति के कोषाध्यक्ष राहुल नामदेव ने बताया कि अंचल के प्रख्यात जसगीत गायक डॉ. के.आर. सिन्हा उनके आदर्श हैं। उन्हीं की भक्ति, गायन शैली और सांस्कृतिक परंपरा से प्रेरणा लेकर समिति के सदस्य सुमिरन से लेकर नवरात्रि के प्रत्येक दिवस के निर्धारित भजनों तक माता की आराधना करते हैं। उनकी प्रस्तुतियों में प्राचीन जसपचरा गीतों के साथ पारंपरिक एवं आधुनिक धुनों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। समिति द्वारा हिंगलाज भवानी के प्राकट्य, हनुमान जन्मकथा, नंदी जन्म, माता के श्रृंगार, सती कथा, राम-रावण युद्ध, महिषासुर मर्दन, रक्तबीज वध, शुंभ-निशुंभ वध तथा कंकालीन माता की गाथा जैसे विविध धार्मिक प्रसंगों पर आधारित सेवा गीत प्रस्तुत किए जाते हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक कथाओं से जोड़ने के साथ लोकगीतों और पारंपरिक जसपचरा की समृद्ध विरासत को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य गायक शिक्षक अर्जुन धनंजय सिन्हा के नेतृत्व में कोरस कलाकार राहुल नामदेव, डिगेश्वरी गोस्वामी, नंदकिशोर सिन्हा, खुमेश, छन्नू, जितेंद्र पाटकर, पार्थ राव पांडरे, मयंक, रौनक एवं हिमांशु अपनी स्वर साधना से सेवा को भावपूर्ण बनाते हैं। नाल वादन में भोजराज ध्रुव, लुकेश ध्रुव, प्रवीण सिन्हा, मोहन ध्रुव एवं गोकुल तथा मांदर वादन में सागर ध्रुव, नरेंद्र, राघव एवं गोविंद अपनी कला से प्रस्तुतियों में पारंपरिक लोकसंगीत की मधुरता भरते हैं। विशेष बात यह है कि बाल कलाकार गुंजन सिन्हा और योगिता सिन्हा भी अपने दादा की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। वे प्रतिदिन देर रात तक भजन गायन में सहभागिता निभाते हुए नई पीढ़ी को भक्ति, लोकसंस्कृति और पारंपरिक संगीत से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। जय मां महामाया सेवा परिवार की यह साधना केवल भजन गायन तक सीमित नहीं है, बल्कि माता के प्रति अटूट श्रद्धा, सामूहिक सेवा भावना और छत्तीसगढ़ की लोकसांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी सुंदर उदाहरण है।

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