EOW ने DG मिनरल्स के डायरेक्टर के ठिकाने पर मारा छापा, 21 लाख नकद, 44 कारतूस और 60 से अधिक प्रॉपर्टी रजिस्ट्री जब्त

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भोपाल। भोपाल में करोड़ों रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने DG Minerals Pvt. Ltd. और Shri Maa Cementech Pvt. Ltd. से जुड़े निवेश धोखाधड़ी प्रकरण में आरोपी दिलीप कुमार गुप्ता के घर और ऑफिस पर तलाशी शुरू की है। मामला शिकायतकर्ता विनीत जैन की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिन्होंने निवेश के नाम पर भारी धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। ईओडब्ल्यू की टीम को छापेमारी में 21 लाख 18 हजार 500 रुपए नकद, 44 जिंदा कारतूस,  विभिन्न लोगों के नाम पर 60 से अधिक रजिस्ट्री जब्त की है। साथ ही आरोपित द्वारा संचालित या उससे संबंध रखने वाली 50 से अधिक कंपनियों की फाइलें मिलीं, जिनमें निवेश, लेन-देन, शेयर अलॉटमेंट एवं अन्य दस्तावेज शामिल हैं। साथ ही कुल 5 हार्ड डिस्क बरामद, डिजिटल रिकॉर्ड व अकाउंट डेटा होने की संभावना है। इसके अलावा अलग-अलग 15 पैन कार्ड बरामद हुए हैं। इससे फर्जी पहचान व वित्तीय अनियमितताओं की आशंका हैं। ईओडब्ल्यू ने एक माह पहले गुप्ता और उनकी कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया था। जानकारी के अनुसार गुप्ता ने 10 रुपए के शेयर को 12 हजार से अधिक रुपए में बेचकर निवेशकों को धोखा दिया। यहीं नहीं उनकी पारिवारिक संपत्तियां भी गिरवी रखवा दी। साथ ही उनको बंद बैंक खातों के चेक दिए गए। 
विनित जैन की शिकायत के अनुसार आरोपी गुप्ता ने माइनिंग कारोबार में भारी मुनाफा देने और कंपनी में डायरेक्टर बनाने का भरोसा दिलाकर उनसे 6.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए। इसके बाद धोखे से शिकायतकर्ता की दो संपत्तियां गिरवी रखवाकर 11.15 करोड़ रुपये का लोन भी अपने कब्जे में ले लिया। इतना ही नहीं, वर्ष 2019 से 2021 के बीच शिकायतकर्ता को आरोपी ने अपने झांसे लेकर  कंपनी के लोन की ईएमआई के लिए 55.13 लाख रुपये भी भरवा दिए। 
शिकायतकर्ता के दबाव डालने पर आरोपी ने रकम लौटाने के लिए 7.74 करोड़ का बंद खाते से चेक जारी किए गए। यहीं नहीं 13 करोड़ का ब्लॉक खाते से चेक जारी किया। दोनों चेक बाउंस हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि 10 रुपए वाले शेयरों का मूल्य कागजों में बढ़ाकर12,972 दिखाया गया और फर्जी शेयर अलॉटमेंट के कागज बनाकर डाक से भेजे गए। बोर्ड मीटिंग जिन तारीखों पर दिखाई गई, उन दिनों कोई बैठक हुई ही नहीं। 
नकद निवेश, गिरवी रखी संपत्तियों से लिए गए लोन और EMI भुगतान को मिलाकर शिकायतकर्ता को लगभग 35.75 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
प्रारंभिक जांच में सभी आरोप सही पाए जाने पर ईओडब्ल्यू ने आरोपी के खिलाफ 120बी साजिश, 420 धोखाधड़ी, 467 / 468  फर्जी दस्तावेज बनाना, 471 फर्जी दस्तावेज का उपयोग की धाराओं में FIR दर्ज की है। ईओडब्ल्यू के अनुसार आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहा था। कई रिकॉर्ड छिपाने या नष्ट करने की आशंका बनी हुई थी, इसलिए कोर्ट से धारा 96 BNSS के तहत सर्च वारंट लिया गया।
कोर्ट की अनुमति के बाद ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही तलाशी में अब तक  प्रॉपर्टी रजिस्ट्रीज, बैंक से जुड़े दस्तावेज, चेक बुक, कैश और अन्य निवेश से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं। पुलिस बरामद दस्तावेजों की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
साभार अमर उजाला

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