आजादी के दशकों बाद भी सड़क को तरस रहा मड़सा गांव
बदहाल रास्ते ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की आवाजाही बनी चुनौती
साहिल खान
शहडोल/जैतपुर देश को आजाद हुए दशकों बीत गए, गांवों के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारें लगातार योजनाएं चला रही हैं, लेकिन शहडोल जिले के बुढ़ार जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भटिया के ग्राम मड़सा में सड़क की बदहाली विकास के दावों को आईना दिखा रही है। गांव में सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि यहां रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और नौजवानों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के दिनों में समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जगह-जगह गड्ढों, कीचड़ और जलभराव के कारण रास्ते पर पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों को भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं पहुंच रहा है।
बीमार को अस्पताल ले जाना भी चुनौती
बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा खामियाजा आपात स्थिति में भुगतना पड़ता है। गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े तो खराब रास्ते के कारण वाहन पहुंचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों के लिए सड़क महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण माध्यम है।
स्कूली बच्चों की राह भी मुश्किल
मढ़सा के बच्चों को पढ़ाई के लिए आने-जाने में भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बारिश में कीचड़ और फिसलन के कारण बच्चों के कपड़े खराब होने के साथ ही गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति के कारण बुजुर्ग और छोटे बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं।
कागजों में विकास, जमीन पर बदहाल रास्ता!
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के विकास को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन मढसा की सड़क इन दावों की हकीकत सामने ला रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति देखे और स्थायी रूप से सड़क निर्माण अथवा सुधार का कार्य कराया जाए।
गौरतलब है कि उपलब्ध पंचायत संबंधी रिकॉर्ड में मढसा को भटिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों में दर्ज किया गया है और भटिया ग्राम पंचायत बुढ़ार जनपद पंचायत के अधीन है।
ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी अब सिर्फ आश्वासन न दें, बल्कि मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का जायजा लें और जल्द सड़क निर्माण की पहल करें, ताकि गांव के बच्चों, बुजुर्गों और आम ग्रामीणों को बदहाल रास्ते से मुक्ति मिल सके।

