घोषणाओं से आगे व्यावहारिक नतीजों पर फोकस: ब्रिक्स 2026 के बाद भारत ने साफ किया अपना रुख
नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन के बाद भारत ने समूह के भविष्य को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि नई दिल्ली समिट से सामने आए नतीजे BRICS के तीसरे दशक में सहयोग और भागीदारी को आगे बढ़ाने के लिए आधार का काम करेंगे। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने रविवार को कहा कि समिट के नतीजे ऐसे प्लेटफॉर्म, फ्रेमवर्क और दिशानिर्देश हैं, जिनके जरिए आने वाले वर्षों में BRICS देशों के बीच जुड़ाव जारी रहेगा।
नई दिल्ली में BRICS 2026 समिट के समापन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलेला ने कहा कि समूह के पास अब ठोस परिणामों के साथ उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मैकेनिज्म भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में BRICS के सदस्य देशों के साथ और अधिक जुड़ाव चाहता है। यानी भारत की प्राथमिकता अब सिर्फ समिट के दौरान घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय उन्हें अमल में लाने और सहयोग को आगे बढ़ाने पर है।
शनिवार को 18वें BRICS समिट में अपनाए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में कई अहम वैश्विक मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। इसमें सीमा-पार आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, व्यापार प्रतिबंध, WTO सुधार, परमाणु सुरक्षा और वैश्विक व्यापार एवं ऊर्जा के सुचारू प्रवाह जैसे मुद्दे शामिल हैं। घोषणापत्र से संकेत मिलता है कि BRICS आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक शासन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
BRICS के आर्थिक एजेंडे में भुगतान व्यवस्था को भी अहम जगह मिली है। घोषणापत्र के मुताबिक, BRICS पेमेंट टास्क फोर्स सदस्य देशों के भुगतान और मैसेजिंग चैनलों के बीच आपसी तालमेल की संभावनाओं की जांच कर रही है। इसके साथ ही व्यापार के निपटान और निवेश के लिए सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है। इससे समूह के भीतर आर्थिक लेनदेन को अधिक सुगम बनाने की कोशिश का संकेत मिलता है।
सुधाकर दलेला ने क्रिटिकल मिनरल्स को भी सहयोग का अहम क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई। वहीं, पूरे समिट में ऐसी समावेशी आर्थिक वृद्धि पर जोर रहा, जिसमें ग्लोबल साउथ को साथ लेकर चलने की बात कही गई। दलेला के मुताबिक, भारत की प्राथमिकताओं को सभी देशों का मजबूत समर्थन मिला और इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि BRICS को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर व्यावहारिक, अमल में लाने योग्य और लोगों पर केंद्रित होना चाहिए।
साभार नवभारत टाइम्स

