देवी दुर्गा स्वरूप में हृदय चक्र पर निवास करती हैं
चैत्र नवरात्रि का आगमन अर्थात् शक्ति की आराधना का पर्व उल्लास उमंग और नव सृजन का पर्व। स्वयं शक्ति स्वरूपा सहजयोग संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवी जी ने नवरात्रि के संदर्भ में अपना संदेश दिया है कि,
हम अपने 'शास्त्रों' में देवी के कई वर्णन पाते हैं। वे सब बिलकुल सही हैं। कुछ गलत नहीं लिखा है। लेकिन उन्हें और उनके महत्व को गहराई से समझने के लिए, आपको सहजयोग के माध्यम से वाइब्रेशंस को पहचानना होगा। हर शक्ति के अलग-अलग स्पंदन होते हैं। यह बहुत ही सूक्ष्म है। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, आप अपनी विवेक शक्ति से इसे बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। जब लोग उन्हें कभी चामुंडा और कभी किसी अन्य नाम से संबोधित करते हैं तो लोग भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन शक्ति (देवी) के अलग-अलग रूप हैं। जब भी आवश्यकता होती है वह उस रूप का उपयोग करती हैं। ऐसा नहीं है कि ये दुर्गा हैं तो ये चामुंडा कौन हैं. वे सब वहाँ हैं। देवी की शक्ति के बिना कोई भी अवतार कोई कार्य नहीं कर सकता। चाहे गुरु हों, या श्री राम या श्री कृष्ण या श्री ईसा मसीह जैसे अवतार हों। हर कोई देवी की शक्ति से काम करता है। इसलिए हमारे देश में मां का सम्मान किया जाता है। भारतीय, शक्ति की पूजा करते हैं। रूपों में अंतर हो सकता है; लेकिन वास्तव में वे सभी शक्ति की पूजा कर रहे हैं।
देवी दुर्गा रूप में हृदय चक्र में निवास करती हैं। वह हृदय चक्र की अध्यक्षता करती हैं। यह वास्तव में हृदय चक्र की शक्तियों में से एक है। जो ऊर्जा इस शक्ति को और अधिक प्रभावी बनाती है वह कुंडलिनी की होती है जब वह वहां आती है। कुण्डलिनी जब ह्रदय में आ जाती है, कुण्डलिनी जगदम्बा है! यह अम्बा है, जो इस शक्ति को बढ़ाती है।
जब कोई व्यक्ति सहज योग को स्वीकार करता है; आत्मसाक्षात्कार के साथ-साथ यह शक्ति यहाँ हृदय में स्थित हो जाती है और उसकी पूर्ण रक्षा करती है। कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। उसके सिर का एक बाल भी छुआ नहीं जा सकता। लेकिन, आपको उन्हें शुद्ध प्रेम और भक्ति के साथ हृदय में स्थापित करना होगा। ( 05/04/2000, नवरात्रि पूजा ) इस नवरात्रि आप अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नजदीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं।

