कृर्षि विस्तार अधिकारी भत्र्ती 2026 आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करें शासन - डाॅ विक्रांत भूरिया
रिपोर्टर :- सलीम हुसैन
झाबुआ। कृर्षि विस्तार अधिकारी समूह 2 एवं उप समुह की भत्र्ती परीक्षा 2026 में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए संवैधानिक आरक्षण का पूर्ण पालन सुनिश्चिित करने एवं आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक किया जावे ।
उक्त मांग झाबुआ विधायक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस डाॅ विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री से की है। भूरिया ने अपने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री म.प्र.शासन को अवगत कराया है कि मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित समूह-2 उप समुह -1 अंतर्गत कृर्षि विस्तार अधिकारी भत्ती परीक्षा 2026 के लिए कुल 2784 पदों पर भत्र्ती अधिसूचित की गई है उपलब्ध जानकारी अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए मात्र 122 पद निर्धारित किए गए है जबकि म.प्र. में अनुसूचित जनजाति वर्ग हेतु 20 प्रतिशत आरक्षण का वैधानिक प्रावधान लागू है इस आधार पर उक्त भत्र्ती में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए लगभग 557 पद अपेक्षित प्रतीत होते है। डाॅ भूरिया ने बताया कि घोषित पदों एवं संवैधानिक आरक्षण के मध्य यह अत्यधिक अंतर गंभीर प्रश्न खडे करता है। यदि विभागीय रोस्टर बैकलांग समायोजन, न्यायालयीन आदेश अथवा अन्य किसी वैधानिक प्रावधान के आधार पर दों का निर्धारण किया गया है तो उसकी विस्तृत एवं प्रमाणिक जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस कारण प्रदेश के आदिवासी युवाओं में व्यापक असंतोष एवं भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
आगे भूरिया ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्रदान करने की गारंटी देता है। अनुच्छेद 14 ,अनुच्छेद 16(4) अनुच्छेद 16(4ए)अनुच्छेद 46 तथा अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा के लिए स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का मूल उदेश्य यही है कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व प्राप्त हो । यदि भत्र्ती प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का विधि सम्मत पालन नहीं किया जाता है तो वह संविधान की भावना तथा समाजिक न्याय के सिद्वातों के विपरित होगा ।
डाॅ भूरिया ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए तत्काल हस्तक्षेप करते हुए मांग की है कि कृर्षि विस्तार अधिकारी भत्र्ती 2026 आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक किया जावे। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित पदों की गणना का आधार रोस्टर रजिस्टर बैकलांग रिक्तयों को विवरण तथा संभी सबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं। यिद किसी न्यायालयीन आदेश अथवा वैधानिक कारण से पदों में परिवर्ततन किया गया है तो उसका स्पष्ट विधिक आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही सम्पूर्ण भत्र्ती प्रक्रिया की वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारीयों द्वारा निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा यदि आरक्षण निर्धारण में कोई त्रुटी पाई जाती है तो उसे तत्काल संशोधित किया जाए समीक्षा पूर्ण होने तक भत्र्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप न दिया जाए जिससे किसी भी वर्ग के संवैधानिक अधिकार प्रभावित न हो । डाॅ भूरिया ने मध्यप्रदेश शासन से अपेक्षा कि वि वह इस गंभीर विषय पर शीघ्र, निष्पक्ष एवं न्यायोचित निर्णय लेकर आदिवासी युवाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चिित करेगें।

