भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ग्रेवल मार्ग : गुराडिया में लाखों की लागत से बनी सड़क और पुलिया बनी किसानों के लिए जी का जंजाल
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के दावों और धरातल की हकीकत में कितना फासला है, इसका जीता-जागता उदाहरण खकनार ब्लॉक के ग्राम गुराडिया में देखने को मिल रहा है। यहाँ किसानों की राह आसान करने और फसलों के सुगम आवागमन के नाम पर लाखों रुपए की लागत से ग्रेवल रोड का निर्माण तो कराया जा रहा है, लेकिन ठेकेदार की मनमानी और घटिया निर्माण के चलते यही सड़क अब अन्नदाताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है।
कागजों पर किसान हित, जमीन पर भारी नुकसान
शासन द्वारा यह सड़क इस उद्देश्य से स्वीकृत की गई थी कि किसानों को खेतों तक आने-जाने और अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में सुविधा हो। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने निर्माण कार्य में जमकर लापरवाही बरती है। सड़क की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि बनने के साथ ही यह जर्जर होने लगी है, जिससे किसानों की खेती और फसलों को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
ठेकेदार का अनोखा खेल: जमीन के अंदर धंसा दी पुलिया
परेशान किसानों ने बताया कि ठेकेदार ने तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर सड़क पर पुलिया का निर्माण किया है। पुलिया को जमीन के भीतर तक खोदकर बना दिया गया है। इस गलत लेवलिंग के कारण खेतों से पानी की निकासी पूरी तरह ठप हो गई है। मामूली बारिश में भी खेतों का पानी बाहर निकलने के बजाय वहीं जमा हो रहा है, जिससे जमीन में नालिया बन रही है।
किसानों की जुबानी:
"लाखों रुपए की लागत से रोड बन रहा है, लेकिन ठेकेदार ने पूरा काम घटिया किया है। पुलिया इतनी नीचे बना दी है कि खेतों का पानी बाहर ही नहीं निकल पा रहा। हमारी मेहनत की फसलें और जमीन बर्बाद हो रही हैं।"
शिकायतों के बाद भी महकमा मौन
इस मामले को लेकर पीड़ित किसानों द्वारा संबंधित ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आज दिनांक तक न तो किसी अधिकारी ने मौके पर आकर सुध ली और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की गई। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी ठेकेदार को शह देने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की ओर इशारा कर रही है।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद जिम्मेदार प्रशासनिक अमला जागता है या फिर गुराडिया के किसान इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण का दंश झेलने को मजबूर रहेंगे।

