वन विभाग घसारही बीट के प्लांटेशन में करोड़ों की हरियाली या कागजों का खेला अधूरी बॉन्डी, अधूरे गड्ढे और भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
जंगल बचाने की योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर एफआईआर
हेमंत कुमार भार्गव शिवपुरी जिला ब्यूरो चीफ रणजीत टाईम्स
करैरा। अमोला दक्षिण वन परिक्षेत्र की घसारही बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 1032 में किए गए नवीन प्लांटेशन कार्य को लेकर क्षेत्र में भारी नाराजगी व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांटेशन के नाम पर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया गया है और जमीनी हकीकत विभागीय अभिलेखों में दर्शाए गए कार्यों से मेल नहीं खाती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस कार्य को पूर्ण बताकर भुगतान निकाला गया, वहां आज भी न तो निर्धारित संख्या में गड्ढे दिखाई देते हैं और न ही प्लांटेशन संरक्षण के लिए आवश्यक बॉन्डी निर्माण पूरा हुआ है।
स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर बॉन्डी निर्माण अधूरा पड़ा हुआ दिखाई देता है, जबकि कुछ जगहों पर केवल पत्थरों को इकट्ठा कर औपचारिकता पूरी करने का प्रयास किया गया है। यदि निर्माण कार्य वास्तव में पूर्ण हुआ है तो उसकी गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्लांटेशन के लिए खोदे गए कई गड्ढे मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कुछ स्थानों पर गड्ढों की संख्या कम दिखाई दे रही है, जबकि कुछ गड्ढों को मशीनों से खोदे जाने की चर्चा भी क्षेत्र में हो रही है। लोगों का सवाल है कि यदि मजदूरों के नाम पर भुगतान किया गया तो फिर मशीनों का उपयोग किस अनुमति से किया गया और यदि मशीनों से कार्य हुआ तो संबंधित मद में भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि वन विभाग द्वारा हर वर्ष पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि धरातल पर कार्य अधूरे हैं और रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण दिखाया गया है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्लांटेशन क्षेत्र का भौतिक सत्यापन कराया जाए, गड्ढों की वास्तविक संख्या की गणना हो, बॉन्डी निर्माण की माप पुस्तिका की जांच की जाए तथा भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों ने कलेक्टर शिवपुरी, वन संरक्षक एवं उच्च वन अधिकारियों से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका की पड़ताल की जाए। यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो राशि की वसूली, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने जैसे कठोर कदम उठाए जाएं।
क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग की है कि यदि प्लांटेशन कार्य मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो पूरे कार्य को निरस्त कर पुनः कराया जाए ताकि शासन की मंशा के अनुरूप वास्तविक पौधरोपण और संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
शिवपुरी जिला ब्यूरो चीफ हेमंत भार्गव

