गणतंत्र दिवस के संदर्भ में आज के भारत के मुद्दे

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संपादकीय : गोपाल गावंडे


भारत आज 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन केवल संविधान लागू होने की याद नहीं है, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है—कि हम संविधान की भावना पर कितना खरे उतर रहे हैं। आज जब देश विकास की तेज़ रफ्तार में आगे बढ़ रहा है, तब कुछ गंभीर मुद्दे भी समानांतर रूप से हमारे सामने खड़े हैं।
संविधान बनाम व्यवहार
संविधान ने हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार दिया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी इन अधिकारों के पूर्ण लाभ से वंचित है।
कानून सबके लिए समान है—यह सिद्धांत काग़ज़ों में तो है, लेकिन व्यवहार में इसका पालन चुनौती बना हुआ है।

कानून-व्यवस्था और न्याय में देरी
आज की सबसे बड़ी समस्या न्याय में देरी है। लाखों मुकदमे वर्षों से लंबित हैं। गरीब और आम नागरिक न्याय के लिए भटक रहा है, जबकि प्रभावशाली वर्ग अक्सर कानून से ऊपर दिखाई देता है।
गणतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब न्याय सस्ता, सरल और शीघ्र हो।

सामाजिक विभाजन और संवाद की कमी
आज का भारत तकनीक में आगे है, लेकिन सामाजिक संवाद में पीछे जाता दिख रहा है।
धर्म, जाति, भाषा और विचारधाराओं के नाम पर समाज में बढ़ती दूरी चिंता का विषय है।
लोकतंत्र का अर्थ केवल मतदान नहीं, बल्कि संवाद, सहिष्णुता और असहमति का सम्मान भी है।

डिजिटल भारत: सुविधा के साथ चुनौती
डिजिटल इंडिया ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ
फेक न्यूज़
अफवाहें
सोशल मीडिया ट्रायल
जैसी समस्याएं भी तेज़ी से बढ़ी हैं।
सूचना का अधिकार और जिम्मेदारी—दोनों का संतुलन आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

पर्यावरण और विकास का संतुलन
विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
जल, जंगल और ज़मीन—ये केवल संसाधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं।
गणतंत्र दिवस पर हमें हरित और टिकाऊ विकास का संकल्प लेना होगा।

नागरिक कर्तव्य: सबसे बड़ी ताकत
संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं, लेकिन कर्तव्यों की याद दिलाना भी उतना ही आवश्यक है।
ईमानदारी, कर पालन, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान—
यही सच्ची देशभक्ति है।

 निष्कर्ष
आज का भारत अवसरों से भरा है, लेकिन चुनौतियों से भी अछूता नहीं।
गणतंत्र तभी मजबूत होगा जब
संविधान किताब से निकलकर जीवन में उतरे,
और हर नागरिक केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी समझे।
गणतंत्र दिवस पर यही संकल्प—
सशक्त लोकतंत्र, जागरूक नागरिक और न्यायपूर्ण भारत।

 

— गोपाल गावंडे
(संपादक)

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