जय जवान जय किसान
शीश झुकता है चरणों में,शत-शत करता हूँ प्रणाम।
एक सेना का वीर जवान, दूसरा है महान किसान।
शौर्य की गाथा लिखता है वो,सीमा का सजग प्रहरी है।
मिट्टी से सोना उगाता जो, त्याग की मूरत गहरी है।
जहाँ शून्य से नीचे पारा, धमनियों में रक्त जमाता है।
उस हिमालय की चोटी पर,जवान साहस दिखाता है।
तपती जेठ की दोपहरी में, जो नंगे पाँव चलता है।
मिट्टी को पसीने से सींचकर,जग का पेट भरता है।
एक रक्षक है मातृभूमि का,दूजा इसका पालनहार।
इन दोनों के कंधों पर, टिका हुआ है सारा संसार।
विजय पताका फहरती है,जब सरहद पर हुंकार भरे।
दुश्मन घुटने टेक देता है, जब वीर जवान प्रहार करे।
नमन है उस वर्दी को, जिसमें देश की आन बसी।
नमन है उस पसीने को,जिसमें जीवन की शान बसी।
एक काल से टकराता है,दूजा अकाल से नहीं डरता।
भारत माँ का युगल है ये, कभी पीछे नहीं हटता।
इनके चरणों की रज मस्तक पर,करते हैं नित्य प्रणाम।
एक सेना का वीर जवान, दूसरा है महान किसान I
उमेश रा. थोरात 9039556193

