करही की महिला समिति में उठा सवालों का तूफ़ान, अनियमितताओं के आरोपों से ग्रामीणों में रोष

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रणजीत टाईम्स शिवपुरी जिला ब्यूरो चीफ हेमंत भार्गव संपर्क सूत्र *9584256700,
शिवपुरी/नरवर। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित संस्कार महिला सामुदायिक समिति, करही इन दिनों गंभीर विवादों के घेरे में है। महिलाओं ने समिति के प्रबंधन एवं प्रेरकों पर वित्तीय अनियमितताओं, मनमानी कार्यशैली और शिकायत करने वालों को दबाव में लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है तथा महिलाओं ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
विकासखंड नरवर के अंतर्गत आने वाली इस समिति से जुड़ी महिलाओं का आरोप है कि सीएलएफ प्रेरकों द्वारा विभिन्न ग्राम संगठनों से कार्यालय सामग्री खरीदने के नाम पर हजारों रुपये की राशि निकाली गई, लेकिन संबंधित सामग्री आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई। महिलाओं का कहना है कि करही, झंडा, रामनगर, सुनारी, कल्याणपुर, पापरेडू, रोनीजा, फतेहपुर और नैनागिर सहित कई ग्राम संगठनों से कथित रूप से चेकों के माध्यम से राशि आहरित की गई।
महिलाओं ने समिति के प्रबंधक वसीम कुरेशी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रेरकों को संरक्षण दे रहे हैं। शिकायत करने वाली महिलाओं को समूह से बाहर करने की धमकी दी जाती है तथा विरोध करने पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। महिलाओं का आरोप है कि समिति में पारदर्शिता की बजाय दबाव और भय का वातावरण बनाया जा रहा है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब प्रेरकों की ओर से 22 मई 2024 को स्कूल गणवेश के नाम पर किए गए ₹2 लाख 43 हजार के भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि समिति से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि यह भुगतान सभी ग्रामों की महिलाओं की सहमति और बैठक में विधिवत हस्ताक्षरों के बाद किया गया था। महिलाओं ने प्रेरकों के आरोपों को स्वयं को बचाने का प्रयास बताया है।
समिति की महिलाओं ने सर्वसम्मति से संबंधित प्रेरकों को सीएलएफ से हटाने की मांग करते हुए प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं में यदि भ्रष्टाचार और मनमानी हावी होगी, तो शासन की मंशा प्रभावित होगी।
अब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया है कि लगातार विवादों के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। महिलाओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शासन से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि महिलाओं के विश्वास और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता बनी रह सके।

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