बालसुलभ अबोध आनंद में रहना ही सहजयोग है

  • Share on :

मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि उस शाश्वत आनंद का अनुभव करना है जो मन को पूर्ण शांति, संतुलन और संतुष्टि प्रदान करता है। सहजयोग में यह आनंद बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होता, बल्कि हमारे भीतर विद्यमान मासूमियत, निर्मलता और अबोधिता के जागरण से स्वतः प्रकट होता है। अबोधिता वह दिव्य गुण है जो मनुष्य को अहंकार, छल, कपट और कृत्रिमता से मुक्त कर सहज, सरल और प्रेमपूर्ण बनाता है। यदि अबोधिता को समझना हो तो हमें एक छोटे बालक की ओर देखना चाहिए, जो संसार की जटिलताओं और मायावी आकर्षणों से अछूता रहकर सहज हँसी, निष्कपट प्रेम और स्वाभाविक आनंद में जीता है। सहजयोग में श्री गणेश इस पवित्र अबोधिता के अधिष्ठाता माने जाते हैं और साधक के भीतर इसी दिव्य गुण की रक्षा एवं पोषण करते हैं। जब यह मासूमियत जागृत होती है, तब व्यक्ति वर्तमान क्षण में स्थापित होकर भय, तनाव और मानसिक अशांति से मुक्त हो जाता है तथा उसका जीवन सहज आनंद से भर उठता है। सहजयोग की संस्थापिका परम पूज्य आदिशक्ति श्री माताजी निर्मला देवी ने 22 अगस्त 1982 के अपने उद्बोधन में कहा था कि मासूमियत ही वह माध्यम है जिससे मनुष्य स्वयं भी आनंद का अनुभव करता है और दूसरों के जीवन में भी आनंद का संचार करता है। उनके अनुसार वास्तविक आनंद किसी बनावट, तर्क या प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि फूल की सुगंध की तरह स्वाभाविक रूप से खिलने वाली अवस्था है, जो किसी को चोट नहीं पहुँचाती, किसी को परेशान नहीं करती, बल्कि प्रेम, करुणा और सहजता का प्रसार करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक निर्दोष और अबोध व्यक्ति ही उस सूक्ष्म आनंद का अनुभव कर सकता है जिसे अत्यधिक गंभीर या केवल तर्कप्रधान व्यक्ति प्रायः अनुभव नहीं कर पाता। यही कारण है कि सहजयोग का मूल उद्देश्य साधक को आत्मसाक्षात्कार के माध्यम से इस चिरस्थायी आनंद की अवस्था तक पहुँचाना है, जहाँ जीवन सहज, संतुलित, भयमुक्त और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बन जाता है। इस दिव्य अनुभव को प्राप्त करने के इच्छुक साधक अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं अथवा www.sahajayoga.org.in पर उपलब्ध विवरण देख सकते हैं। सहजयोग सदैव व पूर्णतया निशुल्क है।

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper