महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर बड़ा फैसला: कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्कीम के विस्तार को दी हरी झंडी, 850 होंगी अदालतें

  • Share on :

नई दिल्ली। बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों की तेज सुनवाई की व्यवस्था से जुड़ी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्कीम के विस्तार को केंद्रीय कैबिनेट ने हरी झंडी दिखा दी। इससे देश में ऐसी अदालतों की संख्या 850 हो जाएगी। फिलहाल ऐसी 779 अदालतें हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने बुधवार को कई फैसले किए।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने रेप और POCSO कानून के मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोट्स की संख्या बढ़ाने की मंजूरी दी। इससे जुड़ी केंद्र की स्पॉन्सर्ड स्कीम की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 5 वर्षों के लिए बढ़ा दी गई, जिस दौरान 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स बनाई जाएंगी। इसके लिए 3788.04 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसमें केंद्र निर्भया फंड से 2353.15 करोड़ रुपये देगा। राज्य 1434.89 करोड़ रुपये देंगे। यह स्कीम 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई थी। अब तक 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट खुली हैं, जिनमें 399 POCSO कोर्ट हैं। इनके जरिए अब तक 4 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है।
3788.04 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया
779 फास्ट ट्रैक अदालतें हैं देश में
850 हो जाएगी इन अदालतों की संख्या
पहली बार यह प्रावधान भी किया गया कि हर कोर्ट में एक जुडिशियल अफसर, एक फुल टाइम सरकारी वकील होंगे। साथ ही छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, ताकि मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए वैष्णव ने कहा कि सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
2019 में इन अदालतों की शुरुआत हुई। तब से इनमें बलात्कार और पॉक्सो के 4.02 लाख से अधिक मामलो का निपटारा हुआ। अभी 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 779 ऐसी अदालतें हैं। अब इनकी संख्या 850 करने का लक्ष्य है। मार्च 2023 में जहां इन अदालतों में 2.02 लाख मामले लंबित थे, 2025 तक यह संख्या बढ़कर 2.45 लाख हो गई। यानी सिर्फ अदालतों की संख्या बढ़ाने से बात नहीं बनेगी। जजों की नियुक्ति, पुलिस जांच और अभियोजन में तेजी भी जरूरी है।
साभार नवभारत टाइम्स 

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper